आषाढ़ माह में ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। इस रथ यात्रा में देश-विदेश से शामिल होने के लिए भक्त पहुंचते हैं।
आपने गौर किया होगा कि भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा में से किसी के भी हाथ या पंजा नहीं हैं।
राजा ने शर्त स्वीकार कर ली और विश्वकर्मा भी मूर्ती बनाने के काम में जुट गये। अंधेरा होने की वजह से उन्हें समझ में नहीं आया और तीनों भाई-बहनों की विशाल आंखे बन गयी।
काफी देर तक जब विश्वकर्मा कमरे से बाहर नहीं आए तो राजा ने कौतुहलवश कमरे का दरवाजा खोल दिया। उस समय तक मूर्तियों का पंजा और हाथ बनाना ही बाकी था।
शर्त पूरी नहीं होने पर भगवान विश्वकर्मा उसी स्थिति में मूर्ति बनाने का काम छोड़कर स्वर्ग प्रस्थान कर गये। इसलिए आज तक भगवान जगन्नाथ का ना हाथ है और ना पंजा।