Moumita Bhattacharya       Jun 12, 2023

क्यों नहीं हैं पुरी के जगन्नाथ देव के हाथ?

आषाढ़ माह में ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। इस रथ यात्रा में देश-विदेश से शामिल होने के लिए भक्त पहुंचते हैं।

आपने गौर किया होगा कि भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा में से किसी के भी हाथ या पंजा नहीं हैं।

साथ ही उनकी मूर्तियां नाटी व आंखें विशालाकार होती हैं। इसके पीछे प्रचलित लोक मान्यता के बारे में हम आपको बता रहे हैं।  

भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की मूर्तियां बनाने भेष बदलकर विश्वकर्मा पहुंचे थे। लेकिन पुरी के राजा के सामने उन्होंने एक शर्त रखी थी।

भगवान विश्वकर्मा के शर्तानुसार वह मूर्तियों को अंधेरे में बनाएंगे और मूर्तियां जब तक पूरी नहीं हो जाती, ना तो उनके कमरे में कोई आएगा और ना कोई द्वार खोलेगा।

अगर विश्वकर्मा की शर्तें नहीं मानी गयी तो वह मूर्तियां बनाने का काम अधुरा ही छोड़कर चले जाएंगे।

राजा ने शर्त स्वीकार कर ली और विश्वकर्मा भी मूर्ती बनाने के काम में जुट गये। अंधेरा होने की वजह से उन्हें समझ में नहीं आया और तीनों भाई-बहनों की विशाल आंखे बन गयी।

काफी देर तक जब विश्वकर्मा कमरे से बाहर नहीं आए तो राजा ने कौतुहलवश कमरे का दरवाजा खोल दिया। उस समय तक मूर्तियों का पंजा और हाथ बनाना ही बाकी था।

शर्त पूरी नहीं होने पर भगवान विश्वकर्मा उसी स्थिति में मूर्ति बनाने का काम छोड़कर स्वर्ग प्रस्थान कर गये। इसलिए आज तक भगवान जगन्नाथ का ना हाथ है और ना पंजा।

इनमें से क‍िस शहर में रखी है 3000 साल पुरानी Mummy?

A. अजमेर

B. लखनऊ

C. चंडीगढ़