पिछले कुछ सालों के दौरान चक्रवाती तूफानों की संख्या बढ़ने का प्रमुख कारण पर्यावरण वैज्ञानिक समुद्र के तापमान में वृद्धि को मानते हैं।
अर्थ साइंस मंत्रालय की रिपोर्ट 'जलवायु परिवर्तन का आंकलन' के अनुसार उत्तर भारतीय बेसीन में ट्रॉपिकल साइक्लोन और इसकी वजह से बारिश की तीव्रता बढ़ी है।
1950 के पहले और बाद की तुलना करने पर बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफानों की संख्या साल में 94 से बढ़कर 140 (49% ज्यादा) हो गयी है।
उसी तरह अरब सागर में 1950 के पहले और बाद में आने वाले चक्रवाती तूफानों की संख्या 29 से बढ़कर 44 (52% ज्यादा) हो गयी है।
क्लाइमेट ट्रेंड्स की इस रिपोर्ट के अनुसार, 1998-2018 के बीच अरब सागर में मानसून के बाद अतिशक्तिशाली चक्रवात के बनने की संख्या में वृद्धि हुई है।
1982-2019 तक हुए क्लाइमेट ट्रेंड्स के एक अध्ययन के मुताबिक अरब सागर में चक्रवाती तूफानों में 54% की वृद्धि हुई है जबकि बंगाल की खाड़ी में 8% की कमी आयी है।
इसरो के ग्रुप डायरेक्टर डॉ. एम.एम. अली का कहना है कि चक्रवात के बनने की प्रक्रिया में परिवर्तन नहीं हुआ है लेकिन मौसम में परिवर्तन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में चक्रवात की तीव्रता में काफी तेजी से वृद्धि हो रही है।
पहले चक्रवाती सिस्टम को तूफान बनने के लिए 2-3 दिनों का समय लगता था लेकिन अब डिप्रेशन मात्र 1 दिन के अंदर चक्रवाती तूफान में बदल रहा है।
मुख्य तौर पर लंबे समय तक बनी रहने वाली ग्रीन हाउस गैसों की वजह से ही तापमान और मौसम में परिवर्तन हो रहा है।