बांग्ला कैलेंडर के अनुसार हर साल 25 वैशाख को कविगुरु रविंद्रनाथ टैगोर का जन्मदिवस मनाया जाता है।
उत्तर कोलकाता में स्थित जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी रवींद्रनाथ टैगोर का पुश्तैनी घर है। उनका जन्म भी इसी घर में हुआ था।
आज भले ही गुरुदेव हमारे बीच सशरीर उपस्थित नहीं हैं, लेकिन कोलकाता के कोने-कोने में उनकी उपस्थिति को महसूस किया जा सकता है।
जोड़ासांको रवींद्रभारती विश्वविद्यालय का एक परिसर भी है। इसके आंगन में रवींद्रनाथ टैगोर की आवक्ष मूर्ति लगी हुई है।
इस हवेलीनुमा विशाल घर में रवींद्रनाथ टैगोर को समर्पित एक म्यूजियम है, जिसमें उनकी इस्तेमाल की हुई कई वस्तुएं और पुरानी अनदेखी तस्वीरें भी सुरक्षित रखी हुई हैं।
कोलकाता के प्रमुख स्थानों में से एक धर्मतल्ला इलाके में भी रवींद्रनाथ टैगोर की हाथों में किताब लिये हुए एक मूर्ति लगी हुई है।
कोलकाता में कला व संस्कृति से जुड़े किसी भी जुलूस में लोगों के हाथों में रवींद्रनाथ ठाकुर की तस्वीर आपको जरूर नजर आएगी।
किसी भी सांस्कृतिक समारोह के मंच पर कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि जरूर अर्पित की जाती है।
कोलकाता के प्रसिद्ध रवींद्रसदन में गुरुदेव की एक विशालाकार तस्वीर रखी हुई है जो यहां आने वाले दर्शकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है।
कोलकाता के दिल में रवींद्रनाथ टैगोर इस तरह से बसे हुए हैं कि गणतंत्र दिवस परेड में उनकी रचित गीतों पर नृत्य प्रस्तुत करने के साथ ही उनके जीवन पर आधारित झांकी जरूर होती है।
कोलकाता और पश्चिम बंगाल के लोग कविगुरु रवींद्रनाथ से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं।