महात्मा गांधी की एक अनुयायी कैथरीन हिलमन ने 1948 में लक्ष्मी आश्रम का निर्माण करवाया था। इसे सरला आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। वह गांधी जी की बहुत बड़ी प्रशंसक थी। 1931 में वह लंदन छोड़कर भारत आ गईं और महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गईं। बाद में उन्होंने अपना नाम सरलाबेन रख लिया और हिमालय के क्षेत्र में रहने वाली लड़कियों को शिक्षित करने के लिए इस आश्रम की स्थापना की। इस आश्रम में लड़कियों को खाना बनाने, सब्जियां उगाने और साफ-सफाई के बारे में सिखाया जाता है। इतना ही नहीं, इस आश्रम में कई अनाथ लड़कियां व औरतें भी रहती हैं। आश्रम का उद्देश्य कुमाऊं की महिलाओं को रहने के लिए एक सुरक्षित स्थान मुहैय्या कराना है और साथ ही उन्हें ऐसे हुनर भी सिखाना है, जिससे वह आत्मनिर्भर बन सके।



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