कुमाऊं - एक मनोरम हाईलैंड

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गढ़वाल की तरह ही कुमाऊं उत्तराखंड का प्रशासनिक संभाग है। कुमाऊं के प्रशासनिक क्षेत्र के अंतर्गत चंपावत, नैनीताल, अल्मोरा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और उद्धमसिंह नगर जिले आते हैं। कुमाऊं क्षेत्र उत्तर में तिब्बत, दक्षिण में उत्तर प्रदेश, पूर्व में नेपाल और पश्चिम में गढ़वाल से घिरा हुआ है। इस क्षेत्र की स्थानीय भाषा कुमाऊंनी है और नैनीताल, अल्मोड़ा, हल्द्वानी, मुक्तेश्वर, पिथौरागढ़, काशीपुर, रुद्रपुर और रानीखेत यहां के प्रमुख शहर हैं।

कुमाऊं शब्द की उत्पत्ति कूर्मांचल शब्द से हुई है, जिसका मतलब होता है कूर्म अवतार। कूर्म अवतार भगवान विष्णु के कछुए के रूप में लिया गया अवतार है। यह जगह कुमाऊं आर्मी रेजीमेंट के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। इस क्षेत्र में कई मेले और त्योहारों जैसे- नंदा देवी मेला, चैती मैला, हिल जतरा, भगवाल, उत्तरायनी मेला और कंदाली का हर्षोउल्लास के साथ आयोजन किया जाता है।

क्या है कुमाऊं के आस पास 

अब्बोट माउंट यहां की एक खूबसूरत पहाड़ी है, जिसपर सिर्फ 13 बंगले हैं। इसका निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में किया गया था। जॉन हारोल्ड अब्बोट का बंगला बर्फ से ढके पहाड़ों और घने शाहबलूत व देवदार के पेड़ों के बीच बना है। इसके अलावा ओम या आदि कैलाश पर्वत भी पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है, जो कि 6191 मीटर ऊंचा है।

इसे बाबा कैलाश, जोंगलिंगकोंग चोटी और छोटा कैलाश के नाम से भी जाना जाता है। पर्यटकों के बीच इसकी खासी लोकप्रियता की एक वजह यह है कि इसकी चोटी पर ओम के आकार में बर्फ जमी हुई है। ऐसा आकार तिब्बत स्थित कैलाश पर्वत पर भी बनता है।

पर्यटन की दृष्टि से मिलम ग्लेशियर यहां का एक और प्रसिद्ध स्थान है। यह 5500 मीटर से 3870 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 37 स्क्वायर किमी में फैला यह ग्लेशियर कुमाऊं क्षेत्र का सबसे बड़ा ग्लेशियर है। इस ग्लेशियर तक पहुंचने के लिए लंबी पैदल यात्रा करनी पड़ती है। रास्ते में मुनस्यारी नामक छोटा सा तहलीस पड़ता है, जिसे पर्यटक रुकने के लिए चुन सकते हैं।

मिलम ग्लेसिशर तक पहुंचने के क्रम में पर्यटक खूबसूरत झरनों, रोमांचित कर देने वाले जंगलों और कई गांवों से होकर गुजरते हैं। पिण्डारी ग्लेशियर कुमाऊं क्षेत्र का एक और आकर्षण है, जो 3627 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। बागेश्वर जिले का यह ग्लेशियर नंदा कोट और नंदा देवी की चोटियों के बीच में है। पिण्डारी नदी इसी ग्लेशियर से निकलती है और उत्तर की दिशा में बहती है।

मुनस्यारी यहां का एक और शानदार पर्यटन स्थल है, जो समुद्र तल से 2298 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। हिमायल के बीच में बसे इस जगह से त्रिशूल, नंदा देवी और पंचाचूली चोटियों का विहंगम नजारा देखने का मिलता है। चीड़ व देवदार के पेड़ और बुरुंश के फूल यहां की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। इन क्षेत्रों में भ्रमण के दौरान अलग-अलग तरह के वनस्पति और जीव-जंतुओं की प्रजातियां देखने को मिलती है।

नंदा देवी की चोटी, रालम, मिलम और नामीक की पैदल यात्रा करने वाले पर्यटक मुनस्यारी में ही रुकते हैं। पर्यटकों को और अधिक आकर्षित करने के लिए इस क्षेत्र में स्काईंग के अलावा अन्य दूसरे शीत खेलों का विकास बड़ी तेजी से हो रहा है। पिण्डार घाटी के पश्चिम में बसा सुंदरधुंगा एक और महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। यहां मटकोटी और सुखराम नाम के दो ग्लेशियर हैं। सुंदरधुंगा का शाब्दिक अर्थ होता है- ‘खूबसूरत पत्थरों की घाटी।’

कुमाऊं कैसे जाएं

कुमाऊं से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर है, जो भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो लखनऊ, दिल्ली और हावड़ा से सीधे जुड़ा हुआ है। बस से कुमाऊं जाने की ख्वाहिश रखने वाले पर्यकटों को आसपास के शहरों से आसानी से बसें मिल सकती है।

कुमाऊं का मौसम

कुमाऊं का मौसम पूरे साल के दौरान खुशगवार बना रहता है। अगर आप ठंड के मौसम में कुमाऊं घूमने की योजना बना रहे हैं तो बेहतर होगा कि गर्म कपड़े रख लें। अगर आप बरसात में मौसम में कुमाऊं जाना चाहते हैं तो बारिश से बचने का सामान लेना न भूलें।

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