माणिक्य की राजधानी बनने के बाद इस शहर को बखूबी सजाया गया था। इसी कोशिश में दीघी झील के पास स्थित जगन्नाथ मंदिर का निर्माण किया गया। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में मौजूद जगन्नाथ की मूर्ति (नीलममाधव की मूर्ति) को पूरी के जगन्नाथ मंदिर ने दान में दिया था।
आज यह मंदिर राष्ट्रीय धरोहर है। इसका निर्माण बेहद खूबसूरत तरीके से किया गया है और इसके डिजाइन में इस्लामिक प्रभाव भी देखा जा सकता है। मंदिर की चोटी पर एक मेहराबदार छत के अलावा एक गुंबद भी है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है इसका शिखर, जो कि एक नारंगी रंग का चार तल्ला टावर है। इसे एक अष्टभुजीय आधार पर खड़ा किया गया है।
मंदिर में हेमदपंथी और अरबिक शैली का संगम भी देखा जा सकता है। हालांकि मंदिर के अंदर का हिस्सा हिंदू धर्म को प्रदर्शित करता है, जहां के स्तंभ और दीवार पर भगवान कृष्ण की कहानियों का वर्णन किया गया है।



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