अगर त्रिपुरा के उत्कृष्ट वास्तुशिल्पीय निर्माण की बात की जाए तो उसमें अगरतला के उज्जयंता महल का नाम सबसे पहले आएगा। फिलहाल इसका इस्तेमाल राज्य की विधानसभा के रूप में किया जा रहा है। इंडो-ग्रीक शैली के इस महल को महाराजा राधाकिशोर माणिक्य ने बनवाया था। 1899 से 1901 के बीच बने इस महल के मुख्य डिजाइजर मेसर्स मार्टिन एंड कारपोरेशन के सर एलेक्जेंडर मार्टिन थे। नोबल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर ने इसे उज्जयंता महल नाम दिया था।
महल में एक सिंहासन कक्ष, दरबार हॉल, रिसेप्शन हॉल और लाइब्रेरी है। इसके अलावा यह महल छोट-छोटे गार्डन से घिरा हुआ है। महल करीब 800 एकड़ में फैला है और इसके परिसर में ही जन्नाथ और उमामहेश्वर मंदिर स्थित है।
इस महल में तीन गुंदबनुमा डिजाइन बने हुए हैं। इनमें से सबसे बड़ा गुंबद 26 मीटर की ऊंचाई पर है। महल के अंदरूनी भाग को लकड़ी की बेहतरीन नक्काशी से सजाया गया है। इसमें लगे विशाल दरवाजे में भी बेहद बारीकी से काम किया गया है। ऐसा माना जाता है कि उस समय महाराजा ने इस महल के निर्माण में करीब 10 लाख रुपए खर्च किए थे।



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