आगरा के बाहरी इलाके में बालुचपुरा स्टेशन और सिकंदरा के पास स्थित गुरु का ताल एक ऐतिहासिक सिख गुरुद्वारा है। संत बाबा साधू सिंह जी मुनी के नेतृत्व में 1970 में इस गुरुद्वारे को मुख्य रूप से सिख समुदाय के योगदान से बनवाया गया था।
इस तीर्थ स्थल का निर्माण सिख के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया था। गुरुद्वारे में एक ताल यानी जलाशय है, जिसका ऐतिहासिक महत्व है। इसी ताल में गुरु तेग बहादुर ने अपने बाजुओं को रखा था और अपने आप को मुगल बादशाह औरंगजेब की सेना के हवाले कर दिया था।
इस ताल में पहले नक्काशीयुक्त 12 मीनारें थीं, पर समय की कसौटी पर सिर्फ 8 मीनारें की खड़ी उतर सकीं। इस गुरुद्वारे को लाल पत्थर से मुगल वास्तुशिल्प शैली में बनाया गया था। यही कारण है कि यह आगरा के किले और फतहपुर सिकरी से काफी मिलता-जुलता है। न सिर्फ शहर, बल्कि दूर-दराज से भी हर धर्म के हजारों श्रद्धालू हर साल इस गुरुद्वारे का भ्रमण करते हैं।



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