मुगल बादशाह शाहजहां की ख्याति स्मारक बनाने के लिए भी रही है। उन्हें वास्तुशिल्प कला की भी अच्छी जानकारी थी। मोती मस्जिद का निर्माण भी शाहजहां ने ही करवाया था। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह मस्जिद एक बड़े मोती के मानिंद चमकता है।
इसका निर्माण आगरा के किले के परिसर में शाही दरबार के लोगों के लिए किया गया था। ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों ने मास्को स्थित संत बासिल कैथिडरल का भ्रमण किया है, उन्हें इस बात का एहसास हो जाता है कि मोती मस्जिद के वास्तुशिल्प शैली की कुछ विशेषताएं उस कैथिडरल से काफी मिलती-जुलती है।
मस्जिद के प्रांगण में किनारे-किनारे मेहराब बने हुए हैं। इसके छत पर सफेद संगमरमर से बने तीन गंबद हैं, जिनके दीवार लाल बलुआ पत्थर से बने हैं। इस पूरे इमारत का निर्माण सफेद संगमरमर से बेहद कलात्मक रूप से किया गया है।
मोती मस्जिद का निर्माण पूरी नजाकत के सथ सममितीय डिजाइन से किया गया है, जिससे इसकी भव्यता खुलकर सामने आती है। यमुना नदी के किनारे पर स्थित यह मस्जिद आगरा शहर से करीब ही है।



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