डू-खंग अथवा सभागार, अल्छी मठ के बीच में स्थित है। मठ में बना यह स्थान सबसे पुराना है जहाँ साधुओं द्वारा अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 12वीं तथा 13वीं शताब्दी में यहाँ अनेक बदलाव किए गए। मंदिर के गलियारों में भगवान बुद्ध के लगभग 1000 भित्तिचित्र बनाए गए हैं।
मंदिर के बाहरी दरवाज़े पर ’महाकाल’ की पत्थर की प्रतिमा है जो हिंदू धर्म के अनुसार विनाश के देवता है। साथ ही ’भवचक्र’ अथवा ’जीवन का चक्र’ बना है जो संसार अथवा चक्रीय अस्तित्व का प्रतीक है। मंदिर की दीवारों पर ’पंच तथागत’ को दर्शाया गया है।
इस मंदिर के प्रमुख भगवान, दिव्य भगवान बुद्ध, वैरोचन है। भगवान की प्रतिमा के चारों ओर बौद्ध धर्म की पवित्र कला अथवा ’मंडल’ के छः प्रकारों से ’पंच तथागत’ की तस्वीरें बनाई गई हैं। ये मंडल भगवान बुद्ध, धर्म के रक्षक, बौद्धिस्त्व तथा अन्यात्माओं के अनेक चित्रों के चारों ओर स्थित है।



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