मेचुका के नीले पहाड़ की घाटियों और घने हरे जंगलों में मेंबा जनजाति के लोग रहते हैं। यह एक चर्चित पर्यटन स्थल है, जो अपनी प्रकृति संदरता और बौद्ध मठ के लिए जाना जाता है। यह मठ करीब 400 साल पुराना है और यहां के पुस्तकालय में कई बहुमूल्य बौद्ध धर्मलेख और पुस्तकों को सुरक्षित रखा गया है।
सबसे पुराने मठों में से एक यह मठ अलोंग के पश्चिमी भाग में स्थित है और इसे सामतेम योंगचा के नाम से जाना जाता है। साथ ही मेचुका में ढेरों मूर्तियां भी पाई जाती हैं। यहां की खूबसूरत मेचुका झील हरियाली से घिरी हुई है। प्राकृतिक दृष्टि से झील के आसपास का क्षेत्र बेहद समृद्ध है।
मेचुका घाटी से सियोम नदी बहती है। मेचुका भारत-तिब्बत सीमा से सिर्फ 29 किमी दूर है। इस क्षेत्र में अदी जनजाति के लोग निवास करते हैं। यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट लीलाबारी में है।



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