राजारानी मंदिर प्रचीन समय की उत्कृष्ट वास्तुशिल्प का बेहतरीन उदाहरण है। लिंगराज मंदिर के उत्तर-पूर्व में स्थित इस मंदिर को 11वीं शताब्दी के मध्य में बनवाया गया था। यह भुवनेश्वर के सबसे ज्यादा घूमे जाने वाले मंदिरों में से एक है। रोचक बात यह है कि मंदिर के गर्भ-गृह में कोई प्रतिमा नहीं है।
पहले हिंदू मंदिर को प्रेम मंदिर माना जाता था, शायद इसी लिए यहां कोई प्रतिमा नहीं हैं। मंदिर के दीवार पर स्त्री और पुरुषों की कुछ कामोत्तेजक नक्काशी की गई है। निर्माण में पीले बलुआ पत्थर के इस्तेमाल के कारण इस मंदिर का नाम राजारानी पड़ा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस मंदिर का रखरखाव करता है और इसमें प्रवेश के लिए टिकट लेना पड़ता है।



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