अपने शासन दौरान पटियाला के राजा, अधिराज भूपिंदर सिंह जिन्होंने चैल को अपनी गीष्मकालीन राजधानी बनाई, यहाँ शिकार खेला करते थे। फिर 1976 में सरकार ने इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया। छोटी सी पहाड़ी पर स्थित और 110 वर्ग कि. मी में फैले इस अभयारण्य में कई तरह के पेड़ पौधे देवदार और बलूत के पेड़ पाए जाते हैं।
यह अभयारण्य कई वन्य जीवी जैसे गोरल, लघुपुंच वानर, इंडियन मुन्टैक, तेंदुआ, कलगीदार साही को आश्रय प्रदान करता है। इसके अलावा चीता, जंगली सूअर, साम्भर, यूरोपीय लाल हिरण, हिमालय का काला भालू, लंगूर और ब्लैक नेप्पड जैसे जानवर पाए जाते हैं। विभिन्न प्रकार के पक्षी जैसे चियर पेसेंट और किल्ज पेसेंट भी यहाँ वास करते हैं। इस अभयारण्य की सैर दौरान आपको कई प्रकार के पक्षी दिखेगे।



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