चुंगथांग की यह पवित्र चट्टान, यहाँ का बहुत रोचक स्थान है। मान्यता है कि इस चट्टान पर गुरु पद्मसंभव विश्राम करने बैठे और अपने पदचिन्ह छोडकर चले गए, जिसके कारण श्रद्धालु चुंगथांग की इन चट्टान को बहुत पवित्र और पूजनीय मानते हैं। आज भी इस चट्टान पर मौजूद गुरुजी के पदचिन्ह इस किंवदंती को प्रमाणित करते हैं। साथ ही, इस चट्टान में मौजूद दरार से पानी का सतत प्रवाह रहता है। इसके अलावा, चट्टान के पास मौजूद छोटे से जमीन के टुकडे पर धान की खेती की जाती है। वैसे तो इस क्षेत्र में धान की खेती करना असंभव है, पर यहाँ धान की खेती होते देखना किसी चमत्कार से कम नहीं। कहते हैं कि यह सब गुरु पद्मसंभव के आशीर्वाद के कारण सफल हुआ, जिन्होंने मुट्ठी भर धान के बीजों को इस जमीन पर बिखेरा, और इस जमीन को धान की खेती के योग्य बनाया।



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