मुगल सम्राट हुमायूँ का मकबरा दिल्ली के प्रसिद्ध पुराने किले के पास स्थित है। इस मकबरे को हुमायूँ की याद में उनकी पत्नी हामिदा बानो बेगम द्वारा ने सन् 1562 में बनवाना शुरू किया था जबकि संरचना का डिज़ाइन मीरक मिर्ज़ा घीयथ नामक पारसी वास्तुकार ने बनाया था। मकबरे को हुमायूँ की मृत्यु के नौ साल बाद बनवाया गया था।
दिल्ली का हुमायूँ का मकबरा लोधी रोड और मथुरा रोड के बीच पूर्वी निज़ामुद्दीन के इलाके में स्थित एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है और 1993 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के रूप में घोषित किया गया तथा भारत में मुगल स्थापत्य कला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
यह बगीचे युक्त मकबरा चारों तरफ से दीवारों से घिरा है जिसमें सुन्दर बगीचे, पानी के छोटी नहरें, फव्वारे, फुटपाथ और कई अन्य चीजें पाई जाती हैं। इस चहारदीवारी में कई अन्य मुगल शासकों की कब्रें हैं।
इस जगह के अन्य मकबरों और इमारतों के नाम हैं –
चारबाग गार्डेन – यह चतुर्भुजाकार पारसी शैली का बगीचा है और पूरे दक्षिण एशिया में अपने प्रकार का पहला है।
नाई का मकबरा – चहारदीवारी के अन्दर नाई-का-गुम्बद नामक एक मकबरा है जो एक शाही नाई की कब्र है। हलाँकि इस पर किसी का नाम नहीं खुदा होने के कारण यह पता कर पाना मुश्किल है कि यह कब्र किसकी है।
हुमायूँ के मकबरे के परिसर के अन्दर अन्य इमारतों में बू हलीमा की कब्र और बगीचा, ईसा खान की कब्र और मस्जिद, नीला गुम्बद, अफसरवाला मकबरा और मस्जिद, चिल्लाह निज़ामुद्दीन औलिया और अरब सराय शामिल हैं।



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