नई दिल्ली में स्थित देश की सर्वोच्च विधि निर्माण संस्था संसद भवन एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। संसद मार्ग स्थित इस आकर्षक वृत्ताकार संरचना में मंत्रियों के कार्यालय, विभिन्न कमेटी रूम और किताबों के एक विशाल संग्रह वाली सुन्दर पुस्तकालय है।
इस वृत्ताकार इमारत में एक गुम्बददार केन्द्रीय हॉल है। शाही अन्दाज में बनी इस इमारत में 144 खम्भों वाला एक बरामदा है। इसका डिजाइन दो अंग्रेजी वास्तुकार सर् एडविन लुटयेन्स और सर् हर्बर्ट बेकर ने बनाया था और यह 1927 में बन कर तैयार हुआ।
सन् 1946 तक इस इमारत ने केन्द्रीय विधानपरिषद और राज्य परिषदों के लिये पुस्तकालय का कार्य किया और बाद में इसे संसदीय हॉल में परिवर्तित कर दिया गया। केन्द्रीय हॉल का भारतीय इतिहास में दो कारणों से बहुत महत्व है – पहला कारण यह है कि इसी हॉल में नेहरू की अगुवाई में अस्थाई सरकार को सन् 1947 में सत्ता हस्तान्तरित हई थी और दूसरा कारण यह कि संसद भवन के इसी हॉल में संविधान का खाका तैयार किया गया था।
वर्तमान में केन्द्रीय हॉल के लोकसभा और राज्यसभा की बैठकों और सदस्यों के बीच विचार विमर्श और कई अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसरों के लिये प्रयोग किया जाता है।
पर्यटकों को अन्दर जाने की इजाज़त नहीं है। हलाँकि पूर्व अनुमति के साथ पर्यटक सदन में चलने वाली कार्यवाही को देख सकते हैं।



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