दिन्जोय सतरा वैष्णव संप्रदाय की असमिया सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था है। यह डिब्रूगढ़ में चबुआ टाउनशिप से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वैष्णव धर्म का पालन करने वाले भक्त नियमित रूप से इस सतरा में जाते हैं। दिन्जोय सतरा की स्थापना अनिरुद्ध देव ने किया था, जिन्हें गोपाल अटादेव के बारह मुख्य भक्त माना जाता है।
मूलतः सतरा उत्तरी लखीमपुर के पास बिसनुबालिकाकुंशी गांव में स्थित था। मोआमोरिआ विद्रोह के दौरान, दिन्जोय सतरा मुसीबतों में गिर गया। मुखिया की मौत के बाद कई सालों तक सतरा में धार्मिक सीट खाली पड़ी रही। बाद में बर्मी आक्रमण सतरा की शांति की तबाही का कारण बना।
दिन्जोय सतरा अपनी प्रार्थनाओं और वैष्णव के मानदंडों और संस्कृति के सख्त पालन के लिए प्रसिद्ध है। सतरा की एक यात्रा निश्चित रूप से किसी भी व्यक्ति के आध्यात्मिक पक्ष को उत्पन्न कर देगी। आज दिन्जोय सतरा सिर्फ एक धार्मिक संस्था नहीं है, बल्कि समाज बंधन में एक बहुत ही महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भूमिका निभाता है।



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