केदारेश्वर मंदिर, हाजो में मदनाचला पहाड़ी के ऊपर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर को 18 वीं सदी में राजा प्रमत्ता सिंघा के शासनकाल दौरान बनाया गया था।
केदारेश्वर...
पोवा मक्का को मक्का जितना पवित्र माना जाता है। यह पूर्वात्तर क्षेत्र में मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है, कहते हैं कि हाजो के पोवा मक्का का निर्माण मक्का से लाई गई मिट्टी से किया गया है। पोवा अर्थात एक चौथाई और इसी लिए इसका नाम पोवा मक्का इस बात का...
हयाग्रिवा माधव मंदिर केवल हाजो का ही नहीं बल्कि इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है और यहां अधिक संख्या में श्रद्धालू दर्शन करने आते हैं। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और माना जाता है कि हयाग्रिवा माधव मंदिर में स्थापित भगवान की प्रतिमा पुरी में स्थापित...
गणेश मंदिर, हाजो के महत्वपूर्ण आकर्षणों में से एक है। गणेश मंदिर को देवा भावना भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, यह माना जाता है कि यह स्थान कभी सारे देवताओं की बैठक की जगह थी। इसलिए इसका नाम देवा भावना पड़ अर्थात देवी और देवताओं के मिलने का स्थान।
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जोय दुर्गा मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित हाजो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। वर्ष 1774 में राजा लक्ष्मीनाथ सिंघा द्वारा बनाए गए इस मंदिर की वेदी पर देवी दुर्गा की एक सुंदर सी पत्थर की मूर्ति स्थापित है। राजा लक्ष्मीनाथ सिंघा अहोम साम्राज्य के तत्कालीन राजा थे।...
धोपारगुरी सत्रा का निर्माण संत माधवदेवा ने किया था, जो श्रीमंता शंकरदेवा के सबसे बड़े शिष्य थे। श्रीमंता शंकरदेवा ने ही असम में वैष्णव धर्म का प्रचार किया और इसे असमी संस्कृति के चेहरे के रुप में माना जाता है। धोपारगुरी सत्रा का निर्माण वर्ष 1587 में किया गया था।...