आनेगुंड़ी गांव, हम्पी से लगभग 10 किलोमीटर दूर तुंगभद्रा नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित है। यह विजयनगर साम्राज्य की क्षेत्रीय राजधानी हुआ करती थी, कन्नड़ में इसका अर्थ है हाथियों का गड्ढा। यह क्षेत्र हम्पी से भी पुराना है, रामायण के अनुसार इसे सुग्रीव (वानर राजा) द्वारा शासित किष्किन्धा राज्य माना जाता था।
अगर समय हो, तो सैलानी अंजनियाद्री पहाड़ियों को देखने के लिए आनेगुंड़ी की यात्रा की योजना बना सकते हैं, जो भगवान हनुमान का जन्मस्थान माना जाता है। हम्पी के बाजार से भिन्न, आनेगुंड़ी गांव का वातावरण बहुत शांत है। धरोहर-संरक्षण परियोजना और किष्किन्धा ट्रस्ट ने पर्यटकों के लिए शानदार सुविधाओं की व्यवस्था करवाई है।
तुंगभद्रा नदी पर एक नए पुल का निर्माण करवाया जा रहा है, जो भविष्य में सैलानियों के लिए आनेगुड़ी पहुंचने में मददगार साबित होगा। तब तक, इच्छुक यात्री हरिगोल (बांस से बनी नाव) द्वारा इस स्थान तक पहुंच सकते हैं। गगन महल, पंपा सरोवर लक्ष्मी मंदिर (झील), श्रीकृष्णदेवराय समाधि, आनेगुंड़ी किले का प्रवेश द्वार और सात सरों वाला सर्प आनेगुंड़ी के कुछ प्रमुख आकर्षण हैं।
इस गांव की यात्रा दौरान सैलानी श्री भगवान गवी रंगनाथ का मंदिर, गणेश मंदिर, चिंतामणि शिव मंदिर, हुच्चइअप्पना मठ और जैन मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं।



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