Search
  • Follow NativePlanet
Share
होम » स्थल» बादामी

बादामी पर्यटन या वातापी – चालुक्य राजवंश की राजधानी

47

बादामी उत्तर कर्नाटक के बागलकोट जिले का एक प्राचीन शहर है। यह शहर जो वातापी के नाम से भी जाना जाता है 6 वीं से 8 वीं शताब्दी तक चालुक्य राजवंश की राजधानी था।

बादामी या वातापी का इतिहास

बादामी दो से अधिक शताब्दियों तक पूर्व या पूर्वी चालुक्यों की राजधानी था। चालुक्य राजवंश ने 6 वीं से 8 वीं शताब्दी तक आंध्रप्रदेश तथा कर्नाटक के अधिकाँश भाग पर अधिकार कर लिया था। पुलिकेसी द्वितीय के शासन काल में यह राजवंश अपनी ऊंचाई पर पहुँच चुका था। चालुक्यों के बाद बादामी ने अपनी प्रसिद्धि को खो दिया।

घाटी में स्थित तथा सुनहरे बलुआ पत्थर की चट्टानों से घिरा हुआ वातापी जो कि बादामी का उस समय का नाम था, दक्षिण भारत के उन प्राचीन स्थानों में से है जहाँ बहुत अधिक मात्रा में मंदिरों का निर्माण हुआ। बादामी अपने सुंदर गुफा मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है जो अगत्स्य झील के आसपास स्थित हैं जो घाटी के मध्य में स्थित है।

बादामी के गुफा मंदिर

यहाँ चार गुफा मंदिर हैं जिनमें से तीन हिंदू मंदिर हैं तथा एक जैन मंदिर है।

पहली गुफा

पहला गुफा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहाँ की विशेषता 18 फुट ऊंची नटराज की मूर्ति है जिसकी 18 भुजाएं हैं जो अनेक नृत्य मुद्राओं को दर्शाती है। इस गुफा में महिषासुरमर्दिनी की भी उत्तम नक्काशी की गई है।

दूसरी गुफा

दूसरी गुफा भगवान विष्णु को समर्पित है। इस गुफा की पूर्वी तथा पश्चिमी दीवारों पर भूवराह तथा त्रिविक्रम के बड़े चित्र लगे हुए हैं। गुफा की छत पर ब्रह्मा, विष्णु शिव, अनंतहसहयाना और अष्टादिक्पलाकास के चित्रों से सुशोभित है।

तीसरी गुफा

तीसरी गुफा बादामी की उस काल की गुफा मंदिरों की वास्तुकला और मूर्तिकला के भव्य रूप को प्रदर्शित करती है। यहाँ कई देवताओं के चित्र हैं तथा यहाँ ईसा पश्चात 578 शताब्दी के शिलालेख मिलते हैं।

चौथी गुफा

चौथी गुफा एक जैन मंदिर है। यहाँ प्रमुख रूप से जैन मुनियों महावीर और पार्श्वनाथ के चित्र हैं। एक कन्नड़ शिलालेख के अनुसार यह मंदिर 12 वीं शताब्दी का है।

बादामी में तथा इसके आसपास पर्यटन स्थल

गुफा मंदिरों के अलावा उत्तरी पहाड़ी में तीन शिव मंदिर हैं जिनमें से शायद मालेगट्टी शिवालय सबसे अधिक प्रसिद्ध है। अन्य प्रसिद्ध मंदिर भूतनाथ मंदिर, मल्लिकार्जुन मंदिर और दत्तात्रय मंदिर हैं। बादामी में एक किला भी है जिसमें कई मंदिर भी हैं तथा साहसिक गतिविधियों को पसंद करने वाले पर्यटक यहाँ रॉक क्लायम्बिंग का आनंद उठा सकते हैं।

बादामी एक आकर्षक स्थान है। बलुआ पत्थरों से घिरे होने के साथ साथ यहाँ प्राचीन गुफा मंदिर तथा किला है। इन मंदिरों को देखने के लिए तथा चालुक्य काल की वास्तुकला देखने के लिए बादामी की सैर अवश्य करें।

बादामी की सैर के लिए उत्तम समय

बादामी की सैर के लिए उत्तम समय सितंबर से फरवरी के बीच का होता है।

बादामी कैसे पहुंचे

बादामी तक हवाई मार्ग, रास्ते या रेलमार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है।

बादामी इसलिए है प्रसिद्ध

बादामी मौसम

घूमने का सही मौसम बादामी

  • Jan
  • Feb
  • Mar
  • Apr
  • May
  • Jun
  • July
  • Aug
  • Sep
  • Oct
  • Nov
  • Dec

कैसे पहुंचें बादामी

  • सड़क मार्ग
    बीजापुर तथा हुबली से केएसआरटीसी (कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम) की अनेक बसें उपलब्ध हैं। इसके अलावा बैंगलोर से प्रतिदिन निजी तथा पर्यटक बसें भी उपलब्ध हैं।
    दिशा खोजें
  • ट्रेन द्वारा
    बादामी का निकटतम रेलवे स्टेशन हुबली है जो लगभग 100 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह स्टेशन आसपास के क्षेत्रों तथा भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यहाँ से पर्यटक किराए की टैक्सी या रिक्शा लेकर बादामी तक पहुँच सकते हैं।
    दिशा खोजें
  • एयर द्वारा
    बादामी का निकटतम हवाई अड्डा बेलगाँव हवाई अड्डा है जो लगभग 150 किमी. की दूरी पर स्थित है। बैंगलोर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो लगभग 483 किमी. की दूरी पर स्थित है तथा भारत के सभी प्रमुख शहरों के साथ साथ प्रमुख यूरोपीय, एशियाई, अमेरिकी तथा मध्य पूर्वी देशों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
    दिशा खोजें
One Way
Return
From (Departure City)
To (Destination City)
Depart On
27 Jul,Tue
Return On
28 Jul,Wed
Travellers
1 Traveller(s)

Add Passenger

  • Adults(12+ YEARS)
    1
  • Childrens(2-12 YEARS)
    0
  • Infants(0-2 YEARS)
    0
Cabin Class
Economy

Choose a class

  • Economy
  • Business Class
  • Premium Economy
Check In
27 Jul,Tue
Check Out
28 Jul,Wed
Guests and Rooms
1 Person, 1 Room
Room 1
  • Guests
    2
Pickup Location
Drop Location
Depart On
27 Jul,Tue
Return On
28 Jul,Wed