हेमिस राष्ट्रीय उदृयान को हेमिस हाई आल्टीटयूट राष्ट्रीय उद्यान के नाम से भी जाना जाता है। यह सिंधु नदी के तट पर बना हुआ है और समुद्र स्तर से 3300 - 6000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस पार्क का नाम हेमिस के प्रसिद्ध बौद्ध मठ, हेमिस मठ के नाम पर रखा गया है।
मठ के बाद हेमिस में यहीं पर घूमने के लिए आया जा सकता है। 600 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले इस उद्यान को 1981 में नेशनल पार्क घोषित कर दिया गया था। 1988 तक इस पार्क का विस्तार 3350 वर्ग किमी. के क्षेत्र में कर दिया गया था जिसे बाद में सन् 1990 में 4400 वर्ग किमी. में विस्तृत कर दिया गया। यह साउथ एशिया का दूसरा सबसे बड़ा उद्यान है। इसे भारत का दूसरा सबसे बड़ा समीपस्थ संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है जिसका नाम देश में नंदा देवी वायोस्फियर रिजर्व के बाद लिया जाता है।
यहां कई प्रकार की दुर्लभ और विलक्षण प्रजातियां देखने को मिलती हैं। इस पार्क में मारमोट्स, लंगूर, रेड फॉक्स, हिरन, भेडि़ए, बर्फ में पाई जाने वाली छिपकली और कई खतरनाक प्रजाति के जीव और स्तनधारी पशु पाएं जाते है। यह जगह इन जानवरों के रहने लायक उचित और अनुकूल वातावरण प्रदान करती है।
इस क्षेत्र में कम बारिश होती है जिसके कारण पेड़ो और पौधों में शुष्कता ज्यादा पाई जाती है और जंगल में भी सब - एल्पाइन ब्रिच फिर, जूनीपेर और पापुलस सेलेक्स जैसे वृक्ष पाएं जाते हैं। रिर्पोट के अनुसार, हेमिस में 16 विभिन्न प्रजातियों के स्तनधारी जीव और 70 से अधिक पक्षियों और चिडि़यों की प्रजातियां देखने को मिलती हैं। विलुप्त हो चुके लैमरगियर गिद्ध, गोल्ड़न ईगल, हिमालय का ग्रिफिन गिद्ध और कई अन्य पहाड़ी पक्षी यहां पाएं जाते हैं। पर्यटक साल के किसी भी मौसम में हेमिस नेशनल पार्क की यात्रा पर जा सकते हैं। पार्क में भ्रमण करने का सबसे अच्छा समय मई से अक्टूबर के बीच का होता है इस दौरान पार्क में आराम से घूमा जा सकता है।



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