सारे विश्व में संग्रहालय विज्ञान, संस्कृति, परम्परा और इतिहास से सम्बन्धित वस्तुओं के संरक्षण के लिये समर्पित होते हैं। अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में स्थित जवाहर लाल नेहरू संग्रहालय एक ऐसा ही संग्रहालय है। इसे 1980 में स्थापित किया गया था और राज्य के जनजातीय संग्रहों के लिये समर्पित है। इन संग्रहों के माध्यम से पर्यटक क्षेत्र के जीवनशैली और संस्कृति के बारे में अनुमान लगा सकते हैं।
संग्रहालय कपड़ों, हथियारों, गहनों, पगड़ियों, वाद्य यन्त्रों और हस्तशिल्प के अलावा पुरातत्व वस्तुओं को प्रदर्शित करता है। अपने अनोखे और रोचक संग्रहों के कारण यह संग्रहालय दुनिया भर के पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है। संग्रहालय का कैलिडोस्कोप दृश्य लकड़ी की नक्काशियों, घरेलू सामानों और कपड़ों पर केन्द्रित है।
हस्तशिल्प द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में बेंत के उत्पादों की विशेषज्ञता है। एक ज्ञानवर्धक पुस्तकालय भी यहां उपस्थित है जो लोगों के ज्ञान का दायरा बढ़ाती है। प्रवेशद्वार पर ही जवाहर लाल नेहरू की बड़ी प्रतिमा पर्यटकों का स्वागत करती है। संग्रहालय के भूतल में वाद्य यन्त्र, पारम्परिक कला, हस्तशिल्प और धार्मिक वस्तुयें प्रदर्शित हैं।
हस्तशिल्प मुख्यतः क्षेत्रीय लकड़ी की नक्काशी और बेंत के उत्पादों से बने हैं। संग्रहालय के प्रथम तल पर ईटा किला, मलिनिथान और पश्चिमी सियाँग जिले के नोक्सपर्बत से खोजी गई ऐतिहासिक वस्तुयें हैं। संग्रहालय की दुकान में आदिवासी उत्पाद उपलब्ध रहते हैं जिन्हें पर्यटक यादगार के रूप में खरीद सकते हैं।
जवाहर लाल नेहरू संग्रहालय वर्ष 2011 से तापी मरा के अभियान से समबन्धित वस्तुयें प्रदर्शित कर रहा है। वे माउन्ट ऐवरेस्ट पर चढ़ने वाले अरुणाचल प्रदेश के पहले व्यक्ति हैं।



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