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गुरुकुल का पुरातात्त्विक संग्रहालय,, झज्जर

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इस संग्रहालय की स्थापना 1959 में इसके तत्कालीन निदेशक स्वामी ओमनंद ने किया था और आज यह हरियाणा का सबसे बड़ा संग्रहालय है। संग्रहालय के संस्थापक ने अपने अथक प्रयास से प्रदर्शनी के वस्तुओं का विशाल संकलन किया। यहां राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, इलाहाबाद और बरेली सहित भारत के अन्य राज्यों से एकत्रित किए गए मूर्तियों और सिक्कों का विशाल संग्रह देखा जा सकता है।

इस संग्रहालय में भगवान राम के समय की छोटी-बड़ी ढेरों मूर्तियां भी हैं। उदाहरण के आप यहां पंचवटी के हिरण की प्रतिमा देख सकते हैं, जिसका रूप धारण कर रावण सीता का अपहरण करने के लिए आए थे। यहां कई ऐसी प्रदर्शनी है जो महाभारत का वर्णन करती है। इन्हीं में एक प्रदर्शनी में उस चक्रव्यू को दिखाया गया है, जिसमें अभिमन्यु फंस गए थे और उन्हें मार दिया गया था। यहां चौसर की एक तस्वीर भी है।

इस संग्रहालय में आपको कई रोचक चीजें भी मिल जाएंगी। मसलन, ऊंट के खाल से बने नीलगिरि के ढोल, बिना जोड़ वाली जंजीर, बोतल में रखा गया खेती के उपकरण का लघुरूप और कलियान की पहाड़ी में पाए जाने वाले लचीले पत्थर को देखकर आप रोमांचित हुए बिना नहीं रह सकेंगे। साथ ही यहां मौजूद सिक्कों को नेपाल, श्रीलंका, भूटान, पाकिस्तान, जापान, थाईलैंड, रूस, बर्मा, कनाडा, फ्रांस, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों से लाया गया है।

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