जयंती देवी मंदिर का निर्माण 550 वर्ष पूर्व हुआ था। इसे हिमाचल प्रदेश में स्थित कांगड़ा के शासक की बेटी की इच्छा के सम्मान में बनवाया गया था। शासक की बेटी का विवाह हथनौर के शासक के बेटे के साथ हुआ था जो चंडीगढ़ के उत्तर में स्थित है। राजकुमारी, जयंती देवी की प्रबल भक्त थी जो उनके वंश की देवी थीं।
उसे इस बात की चिंता थी कि शादी के बाद मंदिर के अभाव में वह देवी की पूजा से वंचित रह जाएगी। इसलिए उसने देवी से सहायता प्राप्त करने के लिए कठिन प्रार्थना की।
ऐसा कहा जाता है कि शादी के बाद जब उसकी डोली को उठाया जाने लगा तो डोली इतनी भारी हो गई कि उसे हिलाया ही नहीं जा सका। ऐसी कठिन परिस्थिति देखकर देवी की एक छोटी मूर्ती को डोली के अंदर रखा गया और समस्या हल हुई। इसके बाद हथनौर के शासक ने चंडीगढ़ से 15 किमी दूर शिवालिक पर्वत श्रेणी की एक पहाड़ी पर जयंती देवी के मंदिर का निर्माण करवाया।
जयंती माजरी गाँव और जयंती पुरातात्विक संग्रहालय पहाड़ की तराई में स्थित है। इसके पास ही जयंती राव नाम की एक मौसमी धारा बहती है। इन सबके नाम मंदिर के नाम पर ही रखे गए हैं। करीब सौ सीढीयाँ चढ़कर इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।



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