देवराजस्वामी मन्दिर प्राचीन कला और स्थापत्य कला का बढ़िया उदाहरण है। मन्दिर को भगवान विष्णु की समृति में विजयनगर शासकों द्वारा निर्मित किया गया था। मन्दिर काँचीपुरम शहर के पूर्वी भाग में स्थित है।
मन्दिर में खूबसूरत नक्काशी वाले खम्भे हैं जो उस समय की वास्तुकला और तकनीक का गहन परिचय कराते हैं। सभी खम्भों पर हाथ से नक्काशी की गई है और हिन्दू देवी देवताओं के विभिन्न स्वरूपों को दर्शाते हैं। मन्दिर परिसर के अन्दर ही एक बड़ा सा मैरिज हॉल है जो देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु के खगोलीय मिलन का प्रतीक है।
मन्दिर की विशेषता एक विशाल चेन है जो पत्थर पर तराशी गई है। मन्दिर के अन्दर बने कुण्ड में भगवान विष्णु की दस मीटर ऊँची प्रतिमा डूबी हुई है। विष्णु की प्रतिमा के दर्शन 40 साल में एक बार किये जा सकते है जब भक्तो के लिये भगवान विष्णु की एक झलक दिखाने के लिये कुण्ड को पूरी तरह से खाली कर दिया जाता है। 48 दिनों के बाद मूर्ति फिर से पानी में डूब जाती है।



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