सिख धर्मावलंबियों का तीर्थ स्थान मीठा रीठा साहब का निर्माण 1960 में किया गया था। ऐसी मान्यता है कि गुरू नानक गोरखपंथी जोगी से धार्मिक और अध्यात्मिक चर्चा के लिए यहां आए थे। रतिया और लोधिया नदी के संगम पर बसी यह जगह एक खास तरह के मीठे रीठा फल के पेड़ों के लिए भी प्रसिद्ध है। धेरनाथ का मंदिर मीठा रीठा साहिब के पास में ही स्थित है। बैसाखी पूर्णिमा के अवसर पर इस मंदिर में विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। लोहाघाट-देवीधुरा रोड पर स्थित धुंगाघाट से इस मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।



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