नाभि और कमल का अर्थ तो हम सभी जानते है, लेकिन इन दोनों ही नामों का एक दूसरे के साथ कोई तार्किक सम्बंध नहीं है। परन्तु जब भी भगवान ब्रह्मा के द्वारा इस सृष्टि की रचना पर बात उठती है तो उसके संदर्भ में इन दोनों को ही शामिल किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा, भगवान विष्णु की नाभि के कमल से उत्पन्न हुए थे।
नाभि कमल एक मंदिर का नाम है जो कुरूक्षेत्र में थानेसर में बना हुआ है, इस मंदिर को भगवान ब्रह्मा के जन्म की घटना से जोड़कर देखा जाता है। इस मंदिर दो देवताओं की मूर्ति स्थापित है। एक बड़ा मंदिर न होते हुए भी, यह भगवान ब्रह्मा को समर्पित कुछेक मंदिरों में से एक है।
भारत के अन्य प्राचीन मंदिरों की तरह, नाभि कमल मंदिर में भी एक पवित्र कुंड है जो नारकटारी गांव के समीप ही स्थित है। किंवदंतियों के अनुसार, यह कुंड, पानी से भरा हुआ है जिसे अर्जुन से जमीन में तीर मारकर बनाया था ताकि उस पानी की धार से भीष्मपितामह की प्यास बुझाई जा सके, क्योंकि भीष्मपितामह, युद्ध में घायल होने के बाद तीरों की शर- शैय्या पर लेटे थे।
नाभि कमल मंदिर, पेहोवा - कुरूक्षेत्र मार्ग पर थानेसर से लगभग 1 किमी. की दूरी पर स्थित है।



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