शेख चिल्ली एक बहुश्रुत विद्वान, एक सम्मानित सूफी संत और एक आध्यात्मिक शिक्षक थे। मुग़ल बादशाह शाह जहां का बेटा दारा शिकोह शेख चिल्ली का शिष्य और एक प्रशंसक था बताया जाता है शेख चिल्ली से राजकुमार ने कई महत्त्वपूर्ण बातें सीखी।
शेख चिल्ली का मकबरा कुरुक्षेत्र के बाहरी इलाके में एक ऊंचे टीले पर बनाया गया है। ये मकबरा बहुत ही खूबसूरत है जो मुग़ल वास्तुकला का बखूबी बखान करता है । इस मकबरे को बनाने में बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। ये मकबरा परिपत्र ड्रम के आकार का है जहां मकबरे का गुम्बद नाशपाती के आकार का है। महान संत की कब्र मकबरे के निचले सदन में बिलकुल केंद्र में स्थित है।
इस मकबरे के ठीक बगल में संत कि पत्नी की भी कब्र है जिसका निर्माण सैंड स्टोन से किया गया है और फूलों की डिजाइन से जिसे अलंकृत किया गया है। देखने पर ये मकबरा कुछ हद तक आगरा के ताजमहल से मिलता जुलता है भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा दोनों ही इमारतों को संरक्षित इमारतों का दर्जा दिया जा चुका है।



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