स्तकना मठ एक सुनसान चट्टान पर 60 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। ये स्थान लेह से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिसकी खूबसूरती बेमिसाल है। इस मठ में कई सारे चित्रों और कलाकृतियों का संग्रह किया गया है जिनकी देखरेख तिब्बती बौद्ध धर्म के दृक्पा संप्रदाय के बौध भिक्षुओं द्वारा की जाती है। इस मठ का निर्माण चोस्जे जम्यंग पालकर, जो एक बौद्ध बाबा थे द्वारा वर्ष 1580 में बनाया गया था। ये मठ आज भी 15 वीं सदी की परंपरा और संस्कृति को दर्शाता है। मठ अब एक बौद्ध विरासत के रूप में माना जाता है । अवलोकितेश्वर की संगमरमर की प्रतिमा, जो 'बोधिसत्व' का प्रतीक है यहाँ का एक अन्य आकर्षण है ऐसा माना जाता है कि मूर्ति असम से मठ के लिए मंगवाई गयी थी। इस मठ में एक संग्रहालय है जहाँ मध्ययुगीन काल से सम्बंधित हथियारों और शस्त्रागार को रखा गया है । इस मठ को टाइगर नोज मठ के नाम से भी जाना जाता है क्यूंकि जिस पत्थर पर ये गोम्पा स्थित है वो टाइगर की नाक के समान प्रतीत होती है।



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