फिरंगी चौक, लखनऊ में विक्टोरिया रोड़ और चौक के बीच में स्थित है। इस भव्य स्मारकीय इमारत का नाम इसके पीछे एक तथ्य पर पड़ा है। कहा जाता है कि यह चौक यूरोपियन लोगों के कब्जे में था जिन्हे फिरंगी कहा जाता था और इसी कारण इसे फिरंगी चौक के नाम से जाना जाता है। वास्तव में इस चौक का नाता एक फ्रैंच व्यवसायी, नील के साथ था, जो यहां अन्य फ्रैंच व्यवसायियों के साथ मुगल बादशाह औरंगजेब के शासन काल के दौरान रहता था।
इस महलनुमा निवास पर पहले विदेशा स्वामित्व था, जिसे बाद में एक शाही फरमान के बाद सरकार ने जब्त कर लिया था। बाद में इसे इस्लामी मामलों पर सम्राट के सलाहकारों मुल्लाह असद बिन कुताब शहीद और उसके भाई मुल्लाह असद बिन कुताब उद्दीन शहीद को हस्तांतरित कर दिया गया।
इन दोनों भाईयों ने इस घर को एक बड़े इस्लामिक संस्था में बदल दिया, उनके स्टैचू को कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी ऑफ इंग्लैंड के साथ तुलना भी किया गया। महात्मा गांधी ने भी अपना कुछ समय फिरंगी महल में बिताया है और जिस कमरे में वह ठहरे थे, वहां उनसे जुड़ी यादों को सजाकर रखा गया है। फिरंगी महल का इस्लामी संस्कृति और परंपरा के संरक्षण में अभूतपूर्व योगदान रहा है।



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