मोहाली के गुरुद्वारा अम्ब साहिब का विशेष ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। अगर आप मोहाली जा रहे हैं तो यहां जरूर जाएं। पौराणिक कथाओं के अनुसार काबूल के भाई कुर्म जी ने पांचवें सिक्ख गुरू, गुरू अर्जुन देव जी का आशीर्वाद लेने के लिए अमृतसर की यात्रा की।
हर कोई जहां गुरू साहिब को उपहार भेंट कर रहा था, वहीं वह खाली हाथ उनके सामने खड़ा था। इससे शर्मिदा होकर उन्होंने प्रसाद के रूप में दिए जाने वाले अम्ब को बचाकर रखा और अगली सुबह उसे गुरू को देना चाहा। गुरू अर्जुन देव जी ने उन्हें प्रसाद खाने को कहा और उनसे वादा किया उनका चढ़ावा एक दिन जरूर स्वीकार किया जाएगा।
अपने दादा गुरू अर्जुन देव जी के वादे को पूरा करने के लिए सातवें सिक्ख गुरू, गुरू हर राय जी ने इस गुरुद्वारा का भ्रमण किया। उन्होंने यहां एक अम्ब का पेड़ लगाया और तब से इस जगह को गुरुद्वारा अम्ब साहिब के नाम से जाना जाने लगा।



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