सन् 1972 में स्थापित थेप्पकाडू हाथी कैम्प यात्रियों को प्रकृति के सबसे बड़े स्थलीय जीव के साथ एक प्रतिबन्धित वातावरण में मिलने-जुलने का अवसर प्रदान करता है। थेप्पकाडू हाथी कैम्प में हाथियों को प्रशिक्षित किया जाता है और आजकल इस कैम्प में 23 हाथी रहते हैं। इस संरचना के अन्दर ही कुछ हाथी भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।
थेप्पकाडू हाथी कैम्प में हाथियों की सवारी भोर के साथ-साथ शाम को भी की जा सकती है। शाम के समय हाथियों को नियमित रूप से भोजन दिया जाता है और पर्यटकों का इसे देखने के लिये स्वागत है। हर साल पर्यटकों की संख्या एक लाख के पार जाने के साथ ही यह कैम्प इस दृढ़त्वचीय प्राणी के बारे में शैक्षणिक ज्ञानवर्धन का केन्द्र भी है।
इसप्रकार थेप्पकाडू हाथी कैम्प मुख्यरूप से पर्यावरणीय पर्यटन, घूमने फिरने, मनुष्य-हाथी टकराव को रोकने तथा इस प्राणी के बारे में समझ विकसित करने में सहायक होता है।
समय – प्रातः 5-30 से सांय 6-00 बजे तक
प्रवेश शुल्क – रू 20



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