पावापुरी, नालंदा से 25 किमी दूर है और और जैनियों का तीर्थस्थल है। पावापुरी या अपापपुरी को पापमुक्त शहर भी कहा जाता है। एक कहावत के अनुसार एक सच्चा जैनी यहाँ पापमुक्त हो जाता है। जैन धर्म के सबसे बड़े प्रचारक और अंतिम तीर्थंकर भगवान् महावीर ने पावापुरी में अपना अंतिम उपदेश दिया था।
उन्होंने यहाँ महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था, इसका अर्थ है कि उन्होंने अपनी अंतिम सांस यहीं ली और उनका अंतिम संस्कार भी पावापुरी में ही किया गया। यहाँ दो मंदिर हैं, जलमंदिर और समोशरण । दोनों मंदिर सफ़ेद संगमरमर से बनाए गए हैं।



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