16 वीं सदी में रामचंद्र नायकर द्वारा बनाया गया नमक्कल दुर्गम किला, नमगिरी पहाड़ी के ऊपर स्थित है। इस किले में एक खंड़ित प्राचीन विष्णु मंदिर भी मौजूद है। नमक्कल दुर्गम किला डेढ़ एकड़ के क्षेत्र में फैला है। किले तक पहुंचने के लिए इसकी दक्षिणि पश्चिमी दिशा में तंग सीढियां बनाई गई हैं।
नमगिरी पहाड़ियों के दोनों ओर चट्टानों को काटकर बनाए गए नृसिंहस्वामी और रंगनाथस्वामी मंदिर स्थित हैं। देवताओं के चित्र चट्टानों को काटकर बनाए गए है, इसलिए चट्टानों और पहाड़ों की शक्तियों के कारण वे आज तक बचे हुए हैं। इन चट्टानों में आठ पवित्र पानी के पिंड़ मौजूद है और यहां कई कमल के फूल खिलते हैं।
यह भी माना जाता है कि अपने आप को अंग्रेजों से बचाने के लिए टीपू सुल्तान ने इस किले में शरण ली थी। बाद में इस किले पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था। इस किले का ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व इसे एक देखने योग्य स्थान बनते हैं।



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