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  • 01फुलवारी शरीफ

    फुलवारी शरीफ

    फुलवारी शरीफ को सूफी मत के प्रचीन केंद्र के रूप में जाना जाता है और अनेक महान सूफी संत अकसर यहाँ आते रहते थे। प्राचीन समय के सूफी संतों ने धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए बिहार को मुख्यालय बना दिया था।

    इसी तरह, प्रेम और सहनशीलता का संदेश देने...

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  • 02नाघोल कोठी

    नाघोल कोठी

    नाघोल कोठी एक मुगल वास्तुकार द्वारा ब्रिटिश राज के दौरान बनाया गया मुगल वास्तुकला का एक भव्य उदाहरण है। यह इमारत एक सुंदर बाग से घिरी हुई हैं।

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  • 03खुदाबख़्श ओरिएंटल लाइब्रेरी

    खुदाबख़्श ओरिएंटल लाइब्रेरी

    खुदाबख़्श एक समृद्ध विरासत युक्त लाइब्रेरी है। इस लाइब्रेरी की स्थापना 1900 में की गई थी और इसमें दुर्लभ अरबी और पारसी पांडुलिपियों का एक बड़ा कलेक्षन, राजपूत और मुग़ल पेंटिंग, कुरान जैसी विषम वस्तुओं का 25 प्रकार से बखान तथा अनेक ऐसी पुस्तकें जो दुनिया की किसी...

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  • 04गुरुद्वारा हांडी साहिब

    गुरुद्वारा हांडी साहिब

    गुरुद्वारा हांडी साहिब दानापुर में स्थित है जो प्राचीन पटना शहर से लगभग 20कि.मी. पश्चिम की ओर है। पटना साहिब छोड़ने के बाद गुरु तेग बहादुर के परिवार ने यहाँ अपना पहला पड़ाव बनाया था। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माई परधानी नामक एक बूढ़ी औरत ने उनको खिचड़ी से भरी...

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  • 05अगमकुँआ

    अगमकुँआ अर्थात् ’अथाह कुँआ’ का विशाल ऐतिहासिक महत्व है। यह मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल से संबंधित है और पटना के प्राचीन पुरातात्विक स्थलों में से एक है। इस जगह से अनेक किंवदतियाँ जुड़ी हुई हैं तथा कुछ लोग इसे यातना कक्ष मानते हैं जबकि कुछ लोगों का...

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  • 06गोलघर

    गोलघर अनाज भंडारण को पुर्नपरिभाषित करने का एक अभिनव प्रयास है। इसका निर्माण 1786 में भारी अकाल के मद्येनज़र किया गया और यह एक 29मी. लंबा अनाज भंडार है। अपने विशेष प्रकार की वास्तु प्रकृति के अलावा गोलघर गंगा के पीछे से पूरे शहर का सुंदर नज़ारा प्रस्तुत करता है। यह...

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  • 07सदाकत आश्रम

    सदाकत आश्रम

    सदाकत आश्रम की स्थापना मज़ाहारुल हक द्वारा हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप् में की गई थी। यह जगह मुख्यालय थी जहाँ से राज्य में स्वतंत्रता आंदोलन का संचालन किया गया था। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने अपनी रिटायरमेंट के दिन यहाँ गुज़ारे थे। उनके...

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  • 08शहीद स्मारक

    शहीद स्मारक

    शहीद स्मारक उन सात लीडरों की आदमकद प्रतिमाएं हैं जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में अपने प्राण दिए थे। यह स्मारक उन निडर नायकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता दिखाने के लिए बनाया गया है।

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  • 09गुरुद्वारा बाल लीला मैनी

    गुरुद्वारा बाल लीला मैनी

    गुरुद्वारा बाल लीला मैनी एक घर है जहाँ राजा फतेहचंद मैनी रहता था। युवा गुरु गोबिंद सिंह निःसंतान रानी को मिलने आए और उसे अध्यात्म के माध्यम से सांत्वना दी। रानी ने उबले नमकीन चने उनको परोसे थे जो इस गुरुद्वारे में प्रसाद के रूप में दिए जाते हैं। पुराने प्रवेशद्वार...

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  • 10गुरुद्वारा घई घाट

    गुरुद्वारा घई घाट

    गुरुद्वारा पहिला बारा के नाम से भी जाना जाने वाला गुरुद्वारा घई घाट गुरु नानक देव को समर्पित है, जो अपनी यात्रा के दौरान यहाँ रुके थे क्यांकि यह भगत जैतामल का घर था। जैतामल गुरुजी के सबसे प्रबल अनुयायियों में से एक था और बाद में उसने अपना घर एक धर्मशाला में बदल...

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  • 11गांधी मैदान

    गांधी मैदान इस शहर के नक्षे पर एक बड़ा लैंडमार्क है। पहले इसे पटना लॉन कहते थे। गांधी मैदान पटना के बीच में स्थित है। इसका राजनीतिक और व्यावसायिक महत्व है तथा प्रमुख केंद्रों को इसके चारों ओर स्थित किया जा सकता है।

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  • 12शेरशाह सूरी मस्जिद

    शेरशाह सूरी मस्जिद

    शेरशाह सूरी मस्जिद को शेरशाही भी कहा जाता है। यह मस्जिद वास्तुकला की अफ़गान शैली का एक उम्दा उदाहरण है। 1540-1545 में इसे शेरशाह सूरी ने अपनी श्रेष्ठता के उपलक्ष्य में बनवाया था।

    इस मस्जिद के परिसर के अंदर एक कब्र मौजूद है जिसे एक अष्टकोणीय पत्थर की स्लैब से...

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  • 13गुरुद्वारा गुरु का बाग

    गुरुद्वारा गुरु का बाग

    गुरुद्वारा गुरु का बाग अपने चार साल लंबे भ्रमण के दौरान युवा गुरु गोबिंद सिंह जी के स्वागत की याद दिलाता है। यह तीर्थस्थल पवित्र पिता और पुत्र की पहली बैठक के लिए जाना जाता है। पुराना कुँआ आज भी इस्तेमाल किया जाता है और इमली का वह सूखा पेड़ आज भी परिसर में गर्व के...

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  • 14श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र

    श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र

    श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र एक देखने योग्य स्थान है। फन साइंस गैलरी, पोपुलर साइंस गैलरी, विश्वरूपा, 3डी शो, महासागर, जुरासिक पार्क और इवोल्युशन यहाँ के कुछ बड़े आकर्षण हैं। विज्ञान को रोचक बनाने के लिए अनेक अद्भुत इंटरएक्टिव प्रदर्शनियाँ लगाई जाती हैं और अनेक...

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  • 15गुरुद्वारा गोबिंद घाट

    गुरुद्वारा गोबिंद घाट

    गुरुद्वारा गोबिंद घाट गंगा नदी के तट पर स्थित है और तख़्त श्री पटना साहिब के पास है। इसे कंगन घाट भी कहते हैं जहाँ गुरु गोबिंद सिंह ने बचपन में अपना सोने का कंगन फेंक दिया था। यह जगह गुरु गोबिंद सिंह के बचपन से संबंधित लोककथाओं के लिए प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है...

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