गुरुद्वारा बाल लीला मैनी एक घर है जहाँ राजा फतेहचंद मैनी रहता था। युवा गुरु गोबिंद सिंह निःसंतान रानी को मिलने आए और उसे अध्यात्म के माध्यम से सांत्वना दी। रानी ने उबले नमकीन चने उनको परोसे थे जो इस गुरुद्वारे में प्रसाद के रूप में दिए जाते हैं। पुराने प्रवेशद्वार पर 1608 की नक्काशी बनी है लेकिन गर्भगृह और भीतरी परिसर में इस तीर्थस्थल के अन्य भाग हाल ही में पुनर्निर्मित किए गए हैं।



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