पोर्ट ब्लेयर से 2कि.मी दूर पूर्व में स्थित यह द्वीप अपने खंडरों के लिए प्रसिद्ध है। सैलानी यहाँ अलग अलग युग में बने स्थानों को देखने आते हैं, जिन्होंने आज खंडरों का रूप ले लिया है। ब्रिटिश राज्य से लेकर भारत के स्वतंत्र होने तक यहाँ कई ऐतिहासिक धरोहरे मौजूद है।
पोर्ट ब्लेयर से रॉस द्वीप के फोनेक्स जेट्टी के लिए बोटों कि सेवा उपलब्ध है। यह द्वीप पूरी तरह से भारत नौसेना के अंतर्गत है। यहाँ आने वाले हर सैलानी को आते समय और जाते समय हाजरी लगनी होती है। इतिहासकारों को यह द्वीप बहुत आकर्षक लगता है, क्यूंकि 1857 में, भारत में हुए प्रथम स्वंत्रता आन्दोलन में भाग मेने वाले स्वतंत्रता सैनानियों को यहाँ ब्रिटिश प्रशासन कठोर सजा देती थी।
यह लग भग 80 साल तक युही चलता रहा। इसके अलावा, यहाँ अस्पताल, बेकरी, टेनिस कोर्ट, क्वाटर्स, बाज़ार आदि कई सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई। पर द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के हमले के बाद ये सारी चीजे क्षण भर में खान्दर में बदल गई। रॉस द्वीप के पास स्थित स्मित द्वीप भी देखने योग्य स्थान है।



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