घुग्गा वीर को घुग्गल या जहर दीवान घुग्गा के नाम से भी जाना जाता है जो सहारनपुर से 5 किमी. की दूरी पर स्थित है। नौगाजा पीर की तरह घुग्गल पीर भी अनेक हिंदू और मुस्लिम भक्तों को आकर्षित करता है।
किंवदंती है कि पाटन के राजा की दो पुत्रियां थी जिनका नाम वच्छल और कच्छल था। उनकी शादी के बाद, वच्छल गुरू गोरखनाथ की पूजा करने लगी तो उसे पुत्र की प्राप्ति हुई। यह कहा जाता है कि जब उसे पुत्र पैदा हुआ तो उसकी बहन वहां आई और उसे दो पुत्रों की प्राप्ति हुई, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है वच्छल। गुरू जी को यह बात पता चली और उन्होने उसे एक और पुत्र होने का वरदान दिया लेकिन घुग्गल ने उसकी बहन के बेटों को मार ड़ाला।
इसके बाद जब घुग्गल बड़ा हुआ तो उसने तपस्या की कि उसकी शर्त को पूरा न किया जाए यानि जो गुरू जी ने उसे कहा था वह पूरा न हो। जहां घुग्गल ने तपस्या की थी, उसी जगह को घुग्गल वीर की मरही के नाम से जाना जाता है। इस जगह पर हर साल शुक्ल पक्ष दशमी नाम का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है।



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