पहले विश्व युद्ध में शहीद हुए खासियों को श्रद्धांजलि देने के लिए मोटफ्रान नामक स्मारक अंग्रेजों द्वारा बनवाया गया था। मोटफ्रान के आसपास का क्षेत्र लेवडुह या बड़ा बाजार नाम से जाना जाता है, जो एक देसी बाजार होने के साथ-साथ शहर का सबसे बड़ा बाजार भी है। स्थानीय महत्व के अलावा मोटफ्रान का ऐतिहासिक महत्व भी है, जिससे यह स्थान शिलांग का एक चर्चित पर्यटन स्थल बन जाता है।
मोटफ्रान का शाब्दिक अर्थ होता है- फ्रांस का पत्थर। यह एक स्मारक है, जो 26वें खासी श्रमिक दल के सदस्यों को समर्पित है, जिन्होंने पहले विश्व युद्ध में ब्रिटिश सैनिकों के लिए हथियार, युद्ध सामग्री और दूसरे जरूरी सामान ढोए थे।
इस स्मारक का निर्माण उन सभी 67 श्रमिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया था, जो युद्ध में मारे गए थे। इस स्मारक पर होरेस द्वारा लैटिन भाषा में अभिलेख लिखा हुआ है- ‘Dulce et decorum est pro patria mori’. इसका अर्थ है- ‘‘देश के लिए जान देना एक सुखद अनुभव है।’’
अंग्रेजों ने पहले इस स्मारक को मोट फ्रांस नाम दिया था। चूंकि स्थानीय लोगों को इसके उच्चारण में परेशानी हो रही थी, जिससे यह मोटफ्रान हो गया। आज के समय में मोटफ्रान बेहद भीड़भाड़ वाला स्थान है, जहां दिन भर गहमा-गहमी रहती है।



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