सहेठ श्रावस्ती के बीचों-बीच बसा हुआ है तथा यहां कट्टर बौद्ध खूब आते है। यह बौद्ध मंदिरों की विशाल समूह के लिए प्रसिद्ध है। इस स्थान का उल्लेख कई हिंदू ग्रंथों में भी मिलता है। हालांकि प्राचीन काल में साहेठ शिक्षण, प्रशिक्षण और पूजा का एक समृद्ध केंद्र था किन्तु मध्ययुग के दौरान कई वर्षों तक यह उपेक्षा का शिकार बना रहा।
जब इतिहासकारों और उत्खननकर्ताओं को उस बात का एहसास हुआ कि यही स्थल जेतवन मठ का मूल स्थान था, तब से यह बौद्धों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थान बन गया। वर्तमान में, इसका बड़ा हिस्सा खंडहर ही है, लेकिन फिर भी पर्यटक और बौद्ध नियमित रूप से इस स्थान की यात्रा करते हैं।
कई मठों और स्तूपों समेत मंदिरों की भी खुदाई की गई। यद्धपि स्तूप कुषाण काल के थे, वहीं मंदिर गुप्त काल के दौरान बने हुए पाये गये। कुछ अवशेष मौर्य युग (3 शताब्दी) और 12 वीं सदी के बीच की समयावधि के हैं।



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