श्रीनगर में बनी हई मस्जिदों में से सबसे पुरानी और खास जामिया मस्जिद को 1400 ई. में बनवाया गया था। स्थानीय लोग इस मस्जिद को शुक्रवार मस्जिद के नाम से भी जानते हैं। जामा मस्जिद को पुराने समय में विवादों के चलते कई बार नष्ट कर दिया गया था। हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया था, आखिरी बार महाराजा प्रताप सिंह ने इसको अपनी देखरेख में बनवाया था उस समय से आज तक यह ठीक है।
यह मस्जिद भारतीय सामग्री और मुस्लिम कलाकृति से मिलकर बना हुआ बेमिसाल धार्मिक केंद्र है। इस मस्जिद की वास्तुकला को ब्रिटिश वास्तुकारों ने डिजायन किया था जिसे इंडो - सारासेनिक वास्तुकला के नाम से जाना जाता है। इस अद्भूत डिजायन का परिणाम यह है कि इस मस्जिद में शिखर पर एक गुंबद नहीं है जो अक्सर हर मुस्लिम कलाकृतियों और धार्मिक स्थलों पर हुआ करती है।
इस मस्जिद का देखने लायक मुख्य हिस्सा यहां का प्रार्थना हॉल है जो 370 खंभों पर खड़ा हुआ है, यह सभी खंभे देवदार के मोटे तनों से बने हुए हैं। इस गंतव्य स्थल की शान्ति और इसके आसपास स्थित शोर भरे बाजार के बीच काफी अंतर है लेकिन पर्यटकों को यहां ही यह बात ही सबसे ज्यादा भाती है। जामा मस्जिद में काफी स्पेस है जिसमें एक समय में 30,000 लोग बैठकर नमाज अदा कर सकते हैं।



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