आज शनिवार, 22 अगस्त को वीकेंड के चलते अयोध्या राम मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। भगवान राम के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में एक लाख से भी ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में अगर आप भी दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो थोड़ी समझदारी, लोकल ट्रांसपोर्ट के सही इस्तेमाल और बैग से जुड़े नियमों की जानकारी आपके काफी काम आ सकती है। मंदिर जाने से पहले प्रशासन की क्राउड एडवाइजरी और बारिश से जुड़ी गाइडलाइंस जरूर जांच लें।
मंदिर में सुबह-तड़के से लेकर देर रात तक दर्शन जारी रहते हैं, हालांकि बीच में आरती और भोग के लिए छोटे ब्रेक होते हैं। सुबह के समय भारी भीड़ के कारण लाइन में 75 मिनट से भी अधिक का समय लग सकता है। अगर आप बिना किसी परेशानी के जल्दी दर्शन करना चाहते हैं, तो रात 8 बजे के बाद जाना सबसे अच्छा रहेगा। इसके अलावा, श्रद्धालु श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर मुफ्त आरती पास भी बुक कर सकते हैं, जिससे प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश मिल जाता है।

अयोध्या राम मंदिर: दर्शन का सबसे सही समय और लॉकर के नियम
सुरक्षा कारणों से गर्भगृह के भीतर मोबाइल फोन, कैमरा, चमड़े की बेल्ट और बड़े बैग ले जाने पर पूरी तरह पाबंदी है। श्रद्धालुओं का सामान सुरक्षित रखने के लिए प्रवेश द्वारों के पास मुफ्त लॉकर की सुविधा दी गई है। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं की मदद के लिए हेल्प डेस्क बनाए गए हैं, जहां से फ्री व्हीलचेयर और वॉलंटियर्स की सहायता ली जा सकती है। मंदिर आते समय कम से कम सामान साथ लाएं, ताकि सिक्योरिटी चेकिंग में समय न लगे और आसानी से प्रवेश मिल सके।
| समय | भीड़ का स्तर | किसके लिए बेहतर |
|---|---|---|
| सुबह 6:30 बजे - 11:30 बजे | काफी ज्यादा भीड़ | तड़के दर्शन करने वाले श्रद्धालु |
| दोपहर 1:00 बजे - शाम 5:00 बजे | सामान्य भीड़ | दोपहर में आने वाले श्रद्धालु |
| रात 8:00 बजे - 9:30 बजे | बहुत कम भीड़ | सबसे जल्दी दर्शन के लिए |
अयोध्या राम मंदिर: पार्किंग, रूट टिप्स और बारिश के दौरान सावधानियां
अगर आप निजी गाड़ी से आ रहे हैं, तो ध्यान रखें कि पार्किंग मुख्य मंदिर से 1 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर बनाई गई है। पार्किंग स्टैंड से जन्मभूमि पथ तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा शटल की बेहतरीन सुविधा मौजूद है। इनका किराया तय और काफी कम है, जिससे परिवार के साथ सफर आसान हो जाता है। वहीं, भीड़ के पीक आवर्स के दौरान पैदल मार्ग से जाना सबसे सुविधाजनक और भरोसेमंद विकल्प है।
मानसून के मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं को वॉटरप्रूफ रेनकोट साथ रखने और फिसलन-रोधी (ग्रिप वाले) जूते-चप्पल पहनने की सलाह दी जाती है। पैदल चलने वाले रास्तों पर पीने के पानी के कियोस्क और इमरजेंसी मेडिकल बूथ बनाए गए हैं। अगर आप कम भीड़ वाले समय के अनुसार अपनी यात्रा प्लान करते हैं, तो आपका मंदिर दर्शन का अनुभव सुखद और आध्यात्मिक रूप से बेहद खास रहेगा।



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