साउथ वेस्टर्न रेलवे (SWR) ने बेंगलुरु-मंगलुरु वंदे भारत ट्रेन का सेफ्टी ट्रायल शुरू कर दिया है। यह अहम फील्ड टेस्ट 18 से 22 अगस्त के बीच सकलेशपुर और सुब्रमण्य रोड के ढलान वाले मुश्किल रूट पर किया जा रहा है। ऑटोमेटेड इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) सिस्टम से लैस यह ट्रेन पश्चिमी घाट की कठिन पहाड़ियों से गुजर रही है। तटीय कर्नाटक के लिए तेज रफ्तार रेल कनेक्टिविटी शुरू करने की दिशा में इस ट्रायल को बड़ा कदम माना जा रहा है।
घाटी का यह 55 किलोमीटर लंबा रूट बेहद चुनौतीपूर्ण है, जहां 57 सुरंगें और 1:50 के अनुपात वाला खतरनाक ढलान है। सुरक्षा नियमों के तहत पहाड़ी रास्तों पर ट्रेन की स्पीड 30 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। एक बार मंजूरी मिलने के बाद, दोनों शहरों के बीच सफर का समय घटकर लगभग 7 घंटे रह जाएगा। हालांकि, कमर्शियल सर्विस शुरू होने तक यात्रियों को इस रूट पर बजट फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट का ही सहारा लेना होगा।

बेंगलुरु-मंगलुरु वंदे भारत के विकल्प और उनका किराया
कम बजट में सफर करने वाले यात्रियों के पास इस समय ओवरनाइट स्लीपर ट्रेन या जन शताब्दी जैसी दिन की ट्रेनों का बेहतरीन ऑप्शन है। ट्रेन का किराया जनरल सीटिंग के लिए 300 रुपये से कम और स्लीपर कोच के लिए 700 रुपये तक शुरू होता है। वहीं, कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की बसों का किराया 600 से 1,000 रुपये के बीच है। इन विकल्पों के जरिए प्रति व्यक्ति पूरा सफर 1,500 रुपये से भी कम में तय हो जाता है।
| ट्रांसपोर्ट का माध्यम | औसत किराया | सफर का समय |
|---|---|---|
| जन शताब्दी / एक्सप्रेस ट्रेन | ₹250 – ₹700 | 8.5 – 9.5 घंटे |
| KSRTC ऐरावत / नाइट बस | ₹600 – ₹1,100 | 7.5 – 9 घंटे |
| बेंगलुरु–मंगलुरु वंदे भारत (ट्रायल) | तय होना बाकी (अनुमानित ₹1,000–1,400) | 7 घंटे से कम |
बेंगलुरु-मंगलुरु रूट: बजट स्टे और मानसून में ट्रैवल टिप्स
सोलो ट्रैवलर्स या बैकपैकर्स को मंगलुरु में 1,200 रुपये प्रति रात से कम में साफ-सुथरे हॉस्टल डॉर्म मिल जाते हैं। YHA हॉस्टल या बीच के पास बने गेस्टहाउस जैसे लोकप्रिय स्टे ऑप्शंस फ्री कैंसिलेशन और बढ़िया सुविधाएं देते हैं। लोकल रेस्टोरेंट्स में खाना खाकर आप अपने पूरे दिन का खर्च आसानी से 2,000 रुपये के अंदर रख सकते हैं। मानसून के दौरान प्लान अचानक बदलने पर नुकसान से बचने के लिए फुली रिफंडेबल स्टे ही बुक करें।
अगस्त और सितंबर के दौरान शिराडी और चारमाडी घाट रूट पर भारी बारिश से अक्सर यातायात प्रभावित होता है। पहाड़ी रास्तों पर लैंडस्लाइड (भूस्खलन) की वजह से लंबा जाम लग सकता है और सड़कें बंद हो सकती हैं। सुरक्षित सफर के लिए यात्रियों को मौसम का अपडेट देखकर ही निकलना चाहिए और सुबह जल्दी सफर शुरू करना बेहतर रहता है। वैसे, बारिश के मौसम में पश्चिमी घाट को पार करने के लिए ट्रेन को ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।



Click it and Unblock the Notifications











