3 से 6 सितंबर तक बेंगलुरु का आर्ट ऑफ लिविंग कैंपस बिहारी व्यंजनों के जायके और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहने वाला है। 'बिहार महोत्सव' में रोज सुबह 10 बजे से स्टॉल खुल जाएंगे, जबकि शाम 6 बजे से संगीतमय कार्यक्रमों की महफिल सजेगी। दिन में आने वाले दर्शकों के लिए एंट्री बिल्कुल फ्री रखी गई है। यह आयोजन कनकपुरा रोड स्थित कैंपस में हो रहा है, जहां पहुंचने के लिए नम्मा मेट्रो की ग्रीन लाइन पर सिल्क इंस्टीट्यूट सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन है।
महोत्सव का शुभारंभ आज ध्यान मंदिर में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हो रहा है। इस दौरान लोगों को लोकगीत, समूह गान और फैमिली बाजार का लुत्फ उठाने का मौका मिलेगा। शुक्रवार को कैंपस में जन्माष्टमी का खास जश्न मनाया जाएगा, जिससे शाम के वक्त अच्छी-खासी भीड़ जुटने की उम्मीद है। आध्यात्मिक माहौल और चटपटे स्ट्रीट फूड का यह संगम पूरे परिवार के साथ शाम बिताने का एक बेहतरीन मौका दे रहा है।

बिहार महोत्सव के फूड स्टॉल्स: क्या खाएं और कब पहुंचे?
अगर आप यहां जा रहे हैं, तो सीधे लिट्टी-चोखा के स्टॉल का रुख करें और फिर ठंडे-ठंडे सत्तू शर्बत का मजा लें। इसके अलावा ठेकुआ, सिलाव का खाजा, मखाना खीर, चना घुघनी और दाल पीठा के लिए भी पेट में थोड़ी जगह जरूर बचाकर रखें। दुनिया भर में मखाने के उत्पादन में बिहार का दबदबा है, इसलिए यहां मिलने वाली मखाना खीर तो बिल्कुल मिस न करें। शाम 6 बजे के बाद स्टॉल्स पर लंबी कतारें लगने लगती हैं, इसलिए थोड़ा जल्दी पहुंचेंगे तो बिना ज्यादा इंतजार किए आराम से खाने का आनंद ले पाएंगे।
बेंगलुरु बिहार महोत्सव: कैसे पहुंचे और पार्किंग का क्या है हाल?
यहां पहुंचने के लिए ग्रीन लाइन मेट्रो से सिल्क इंस्टीट्यूट स्टेशन उतरें, वहां से आश्रम महज दो किलोमीटर दूर है जहां के लिए आसानी से ऑटो मिल जाएंगे। इसके अलावा बीएमटीसी की बस रूट 211 से 216 दिनभर आश्रम गेट तक चलती हैं। वैसे तो कैंपस में पार्किंग की व्यवस्था है, लेकिन वीकेंड की शाम को भीड़ बढ़ जाती है, इसलिए मेट्रो से सफर करना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। क्राफ्ट लेन और फूड कोर्ट में काफी पैदल चलना पड़ सकता है, इसलिए आरामदायक जूते पहनकर ही आएं।
फूड आइटम्स के दाम: कितना बजट रखकर चलना होगा सही?
हालांकि महोत्सव के रेट कार्ड आधिकारिक रूप से जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन बेंगलुरु के आम दामों के हिसाब से आप अपने बजट का अंदाजा लगा सकते हैं। यहां दो पीस लिट्टी-चोखा मील की कीमत लगभग ₹135 से ₹149 के बीच, सत्तू शर्बत ₹100 के आसपास और मखाना खीर का एक कप ₹119 तक मिल सकता है। वहीं पैक्ड ठेकुआ और जीआई टैग वाला सिलाव खाजा थोड़ा महंगा जरूर पड़ सकता है, लेकिन इन्हें आप घर के लिए यादगार के तौर पर खरीद सकते हैं।
| आइटम | अनुमानित कीमत (₹) | सोर्स |
|---|---|---|
| मिनी घी लिट्टी मील, 2 पीस | 149 | लिट्टी एक्सप्रेस मेन्यू |
| सत्तू कचौरी साथ में आलू सब्जी | 99 | लिट्टी एक्सप्रेस मेन्यू |
| सत्तू शर्बत | 101.50 | पुष्टि, स्विगी |
| साबूदाना मखाना खीर | 119 | ग्रेट इंडियन खिचड़ी |
| ठेकुआ, 250 ग्राम पैक | 229 | द ठेकुआ कंपनी |
| सिलाव खाजा, जीआई टैग (1 किग्रा) | 1,599 | विलकार्ट, जीआई स्टोर |
अगर आप ₹500 का बजट बना रहे हैं, तो एक मिनी घी लिट्टी मील (₹149), एक प्लेट सत्तू कचौरी (₹99), दो गिलास सत्तू शर्बत (₹203) और एक कप मखाना खीर (₹119) में दो लोग आराम से स्वाद ले सकते हैं। इस तरह कुल खर्च लगभग ₹470 के आसपास आएगा। फूड स्टॉल्स पर बैठकर आराम से खाने और शाम के संगीत का मजा लेने के लिए शाम 5:30 बजे तक पहुंचना सबसे सही रहेगा।



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