अगर आप दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर सफर करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। कांवड़ यात्रा के चलते 4 अगस्त से 12 अगस्त तक इस हाईवे पर गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। भारी वाहनों पर पहले ही रोक लग चुकी थी, लेकिन अब प्राइवेट कारों और बसों को भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग रास्तों से डायवर्ट किया जाएगा। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया है।
गाजियाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर में यात्रियों को भारी ट्रैफिक डायवर्जन का सामना करना पड़ेगा। ज्यादातर ट्रैफिक को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे या मुरादाबाद की तरफ मोड़ा जा रहा है। अगर आप इस रूट से बचना चाहते हैं, तो ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) एक बेहतर विकल्प है। घर से निकलने से पहले लोकल ट्रैफिक अपडेट जरूर चेक कर लें। बारिश की वजह से सड़कों पर फिसलन है, ऐसे में भीड़ को कंट्रोल करने और हादसों से बचने के लिए ये बदलाव किए गए हैं।

दिल्ली-हरिद्वार हाईवे के वैकल्पिक रूट और शहर में एंट्री
| रूट का प्रकार | वैकल्पिक रास्ता | ट्रैवल स्टेटस |
|---|---|---|
| दिल्ली से हरिद्वार | दिल्ली-सहारनपुर हाईवे | हल्के वाहनों के लिए खुला है |
| मेरठ बाईपास | ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) | यात्रियों के लिए बेहतर विकल्प |
| लोकल डायवर्जन | सरधना-मुजफ्फरनगर रोड | भारी ट्रकों के लिए प्रतिबंधित |
हरिद्वार में एंट्री के लिए प्रशासन ने कड़े नियम लागू किए हैं। प्राइवेट गाड़ियों को बैरागी कैंप या पौड़ी में बने पार्किंग लॉट में ही खड़ा करना होगा। हर की पौड़ी पर गंगा स्नान के लिए आपको पैदल ही जाना पड़ेगा। दोपहर की भीड़ से बचने के लिए प्रशासन ने सुबह जल्दी पहुंचने की सलाह दी है। साथ ही, सुरक्षा के मद्देनजर अपनी आईडी (पहचान पत्र) साथ रखना न भूलें।
मानसून के दौरान नीलकंठ महादेव के दर्शन के लिए आपको थोड़ी एक्स्ट्रा प्लानिंग करनी होगी। यहां श्रद्धालुओं की लंबी कतारें और पहाड़ों पर फिसलन भरे रास्ते मिल सकते हैं। कम विजिबिलिटी के कारण रात में सफर करने से बचें। हालांकि, भीड़ को देखते हुए मंदिर के कपाट ज्यादा समय तक खुले रखे जा रहे हैं। पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षित चलने के लिए मजबूत जूते पहनें और रेनकोट या छाता साथ रखें।
इस समय हरिद्वार पहुंचने के लिए भारतीय रेलवे सबसे भरोसेमंद जरिया हो सकता है। कई स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, लेकिन टिकटें बहुत तेजी से बुक हो रही हैं। अगर आप बस से जा रहे हैं, तो डायवर्जन की वजह से ग्रामीण रास्तों पर ज्यादा समय लग सकता है। मौसम पर भी नजर रखें, क्योंकि भारी बारिश आपके प्लान में खलल डाल सकती है। इस आध्यात्मिक यात्रा के लिए धैर्य रखें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें।



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