अगर आप आज (सोमवार, 24 अगस्त) दिल्ली की गर्मी और भागदौड़ से राहत पाने के लिए पहाड़ों का रुख करने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले मौसम का हाल जान लें। IMD के जिला स्तर के पेजों के मुताबिक, देहरादून, नैनीताल और चमोली में आज बादल छाए रहने के साथ कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि, आज सुबह किसी भी जिले के लिए कोई खास चेतावनी जारी नहीं की गई है। फिर भी मानसून में रास्ते कभी भी प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए टाइमिंग का खास ख्याल रखें और बैकअप के तौर पर ट्रेन का ऑप्शन भी तैयार रखें।
बारिश के कारण रातोंरात सड़कों के हालात तेजी से बदले हैं। रविवार, 23 अगस्त तक की रिपोर्ट के मुताबिक, नए भूस्खलन की वजह से राज्यभर में 80 से ज्यादा सड़कें बंद हो चुकी थीं। देहरादून-मसूरी रूट पर भी बीच-बीच में ट्रैफिक रुक रहा है। इसलिए घर से निकलने से पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) के SRMD पोर्टल पर जाकर बंद रास्तों की लेटेस्ट लिस्ट जरूर चेक कर लें।

मसूरी-कैंपटी रूट का हाल: सड़क बही, डायवर्जन लागू
20 अगस्त को डिमटा बैंड के पास सड़क बह जाने के कारण कैंपटी फॉल की तरफ जाने वाले पर्यटकों की आवाजाही पर अब भी असर पड़ रहा है। रास्ते में गाड़ियों की रफ्तार धीमी रहेगी और कई जगह अस्थायी तौर पर वन-वे ट्रैफिक चलाया जा रहा है। मसूरी-कैंपटी हाईवे के प्रभावित हिस्सों पर पुलिस आपको डायवर्जन (वैकल्पिक रास्तों) से भेज सकती है। अपने सफर में थोड़ा एक्स्ट्रा टाइम लेकर चलें और बारिश के दौरान बेवजह लंबे रास्तों पर जाने से बचें।
दिल्ली से देहरादून और नैनीताल रोड अपडेट: इन जगहों पर रहें सावधान
दिल्ली-देहरादून रूट पर सफर कर रहे हैं, तो मोहंड पार करने के बाद शिवालिक की पहाड़ियों के पास सड़क पर कीचड़ और मलबा मिल सकता है। शहरों के अंडरपास में भी कुछ देर के लिए पानी भरने की समस्या आ सकती है। वहीं कुमाऊं (नैनीताल) की तरफ जा रहे हैं, तो कालाढूंगी, काठगोदाम और खैरना के मोड़ों पर विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि बारिश के बाद यहां अक्सर पत्थर गिरते हैं। अपने तय समय में 60 से 90 मिनट का अतिरिक्त मार्जिन रखें और पहाड़ के कमजोर या झुके हुए हिस्सों के नीचे गाड़ी न रोकें।
दिल्ली-देहरादून/नैनीताल: पहाड़ों पर चढ़ने-उतरने का सबसे सुरक्षित समय
कोशिश करें कि पहाड़ी रास्तों का सफर दिन के उजाले में ही पूरा कर लें, क्योंकि इस दौरान विजिबिलिटी अच्छी रहती है और पीडब्ल्यूडी की टीमें भी रास्ते पर तैनात रहती हैं। नीचे दी गई टाइमिंग के हिसाब से ही अपनी यात्रा का प्लान बनाएं और अगर बारिश तेज हो जाए तो गाड़ी रोक लें। रात में घाटी के मोड़ों पर ड्राइविंग से बचें और जहां नया भूस्खलन हुआ हो, वहां ओवरटेक करने की गलती न करें। कीचड़ वाली सड़क पर गाड़ी की रफ्तार बनाए रखें और अगर सामने लैंडस्लाइड होता दिखे, तो सुरक्षित दूरी पर ही रुक जाएं।
| रूट | पहाड़ चढ़ने का सुरक्षित समय | पहाड़ से उतरने का सुरक्षित समय |
|---|---|---|
| दिल्ली–देहरादून (NH 334/7 के जरिए) | सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक | सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक |
| हल्द्वानी–नैनीताल (कालाढूंगी/काठगोदाम के जरिए) | सुबह 8 बजे से सुबह 11:30 बजे तक | सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक |
वंदे भारत, शताब्दी और ट्रेन से सफर का बैकअप प्लान
अगर सड़कों पर जाम या लैंडस्लाइड की दिक्कत होती है, तो ट्रेन आपका सफर आसान बना सकती है। नई दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस सुबह 06:45 बजे छूटती है और दोपहर करीब 12:55 बजे पहुंचाती है। वापसी के लिए देहरादून-आनंद विहार वंदे भारत (सुबह 07:00 बजे) काफी सुविधाजनक है। नैनीताल जाने वालों के लिए नई दिल्ली-काठगोदाम शताब्दी सुबह 06:20 बजे निकलती है। बसों के लिए UTC के ऑनलाइन पोर्टल पर दिल्ली-हल्द्वानी रूट की बसें लिस्टेड हैं, बस निकलने से पहले बसों की टाइमिंग जरूर कंफर्म कर लें।
होटल बुकिंग करते समय ध्यान रखें कि उसमें सेम-डे फ्लेक्सिबल कैंसिलेशन का ऑप्शन हो और निकलने से पहले होटल से वहां तक जाने वाले रास्ते की जानकारी ले लें। इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर जरूर सेव रखें: स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (1070) और ERSS (112), इसके अलावा USDMA वेबसाइट से SEOC के लैंडलाइन नंबर भी नोट कर लें। आज शाम सफर जारी रखने या वापसी से पहले IMD के पेज और PWD के SRMD पोर्टल को दोबारा चेक कर लें। मौसम के अलर्ट बदलते रहते हैं और रास्ते साफ होते ही ट्रैफिक फिर से तेजी से बहाल कर दिया जाता है।



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