क्या आप इस वीकेंड दिल्ली की भागदौड़ से दूर पहाड़ों की सैर का प्लान बना रहे हैं? अगर हां, तो थोड़ा संभलकर निकलने में ही समझदारी है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, गुरुवार 24 सितंबर से रविवार 27 सितंबर के बीच हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है। ऐसे में ट्रैवल प्लान बनाते वक्त बैकअप ऑप्शन तैयार रखें, सुरक्षित रास्तों का चुनाव करें और फ्लेक्सिबल स्टे ही बुक करें ताकि देरी होने पर नुकसान न हो। हालांकि ज्यादातर मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स खुले हैं, लेकिन पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन, कीचड़ और छोटे-मोटे जाम की वजह से आपकी मंजिल तक पहुंचने में थोड़ी परेशानी आ सकती है।
अलग-अलग जिलों से आ रहे मौसम के संकेत थोड़े मिले-जुले हैं। IMD की सिटी फॉरकास्ट के मुताबिक, 26-27 सितंबर को नैनीताल और चमोली के आसपास मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। वहीं हिमाचल के मैदानी और मध्य-पहाड़ी इलाकों में शुक्रवार से बारिश का नया सिलसिला शुरू होने की संभावना है, जिससे ऊंचे दर्रों पर भी मौसम खराब रह सकता है। हाल ही में भूस्खलन के कारण हल्द्वानी-कालाढूंगी रोड बंद हो गई थी। इसके अलावा, इस हफ्ते गोंधला के पास मनाली-लेह रूट पर भी गाड़ियों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।

दिल्ली से वीकेंड ट्रिप के लिए अपनाएं ये सुरक्षित रास्ते
दिल्ली से शिमला की यात्रा के लिए नेशनल हाईवे 44 और 5 वाले अंबाला-कालका-सोलन रूट को प्राथमिकता दें और अंदरूनी डायवर्जन से बचें। अगर नैनीताल जा रहे हैं और पहाड़ी रास्ते गीले हैं, तो रामपुर-बाजपुर-कालाढूंगी-जियोलीकोट वाला रास्ता चुनें। मसूरी के लिए देहरादून-राजपुर-माल्सी-भट्टा रूट बेहतर है; ध्यान रखें कि 'पानी वाला बैंड' के पास ढलान की मरम्मत चल रही है, इसलिए वहां रफ्तार धीमी रखें। सुबह तड़के निकलने से पहले हिमाचल प्रदेश पुलिस के अपडेट्स, जिला चैनलों और हाईवे डैशबोर्ड को जरूर चेक कर लें और सफर में 60 से 90 मिनट का एक्स्ट्रा टाइम मार्जिन लेकर चलें। फ्यूल के उतार-चढ़ाव को छोड़कर, अमूमन एक कपल के लिए वीकेंड का बजट 8,000 से 12,000 रुपये तक बैठता है।
| दिल्ली से रूट | सुरक्षित मुख्य मार्ग | भारी बारिश में इनसे बचें | खास सलाह |
|---|---|---|---|
| शिमला | अंबाला-कालका-सोलन (NH 44/5) | शोघी-कंडाघाट की तंग गलियां; अंदरूनी किन्नौर की ओर जाने वाले रास्ते | नेशनल हाईवे पर ही रहें; दिन के उजाले में ही पहाड़ चढ़ें |
| नैनीताल | रामपुर-बाजपुर-कालाढूंगी-जियोलीकोट | हल्द्वानी-काठगोदाम-जियोलीकोट; काठगोदाम-हैड़ाखान-खानस्यू | कुमाऊं ट्रैफिक हेल्पलाइन चेक करते रहें |
| मसूरी | देहरादून-राजपुर-माल्सी-भट्टा | कैम्प्टी-यमुना घाट वाले हिस्से; 'पानी वाला बैंड' | मरम्मत वाले इलाकों के पास गाड़ी धीमी चलाएं |
रिफंडेबल स्टे, बस-ट्रेन का टाइम मार्जिन और लाइव अपडेट्स
होटल बुक करते समय 24-48 घंटे फ्री कैंसिलेशन वाला विकल्प ही चुनें और बुकिंग के बाद व्हाट्सएप के जरिए होटल से रास्ते का हाल कन्फर्म करें। हालांकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म फ्लेक्सिबल फिल्टर दिखाते हैं, लेकिन सड़क की सटीक जानकारी होटल वाले ही दे सकते हैं। बस या ट्रेन से सफर कर रहे हैं, तो सुबह के स्लॉट चुनें और अपनी आगे की कनेक्टिंग राइड में कम से कम एक सर्विस का बैकअप टाइम लेकर चलें। बारिश के बाद डायवर्जन की आशंका को देखते हुए बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन 30-60 मिनट पहले पहुंचे। चार धाम रूट के लिए IMD Nowcast और ड्राइव के दौरान लाइव एडवाइजरी लगातार चेक करते रहें।
ट्रेकिंग, वॉटरफॉल और भूस्खलन: क्या करें और क्या न करें
ऑरेंज अलर्ट के दौरान संकरे झरनों, घाटियों या बिना रेलिंग वाले रिज ट्रैक्स पर जाने से बचें। शाम 4 बजे के बाद बरसाती नालों या नदियों को पार न करें, क्योंकि शाम के वक्त पानी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। अपने पास हमेशा बाहर निकलने के दो रास्ते ध्यान में रखें और कटे हुए पहाड़ों या भूस्खलन की आशंका वाली ढलानों के नीचे गाड़ी खड़ी न करें। IMD के 'दामिनी' ऐप से बिजली चमकने के अलर्ट पर नजर रखें और अगर 10 किलोमीटर के दायरे में बिजली गिर रही हो, तो तुरंत सुरक्षित जगह रुक जाएं। पानी भरे रास्तों में ऑनलाइन मैप्स के बजाय लोकल गाइड की बात ही ज्यादा काम आती है।
सफर के लिए सामान हल्का लेकिन वॉटरप्रूफ ही पैक करें। अच्छी क्वालिटी की रेन जैकेट, जल्दी सूखने वाले (क्विक-ड्राई) कपड़े और अच्छी ग्रिप वाले एंकल-सपोर्ट जूते साथ रखें। इसके अलावा बैकपैक कवर, शू कवर, ORS, पावर बैंक और थोड़ा कैश भी बैग में रख लें। पहाड़ी बाजारों और संकरी सीढ़ियों पर चलने के लिए एक लंबी छतरी काफी काम आती है। थोड़ा लचीला प्लान, समय-समय पर अपडेट्स और समझदारी से की गई ड्राइविंग आपके इस वीकेंड ट्रिप को सुरक्षित और यादगार बना देगी।



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