दिल्ली-एनसीआर से हिमाचल प्रदेश का रुख करने वाले सैलानियों को इस बार लंबे और मुश्किल सफर का सामना करना पड़ सकता है। राज्य में 10-11 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। 5 सितंबर तक मिली जानकारी के मुताबिक, मंडी और कुल्लू समेत पूरे राज्य में करीब 85 से 87 सड़कें भूस्खलन के कारण बंद थीं। कई प्रमुख टूरिस्ट रूट भी इसकी चपेट में आए हैं, जिनमें मंडी-कुल्लू-मनाली नेशनल हाईवे (NH-3) और कुमारहट्टी-मितियां के पास नालागढ़-रामशहर-शिमला लिंक रोड शामिल हैं। ऐसे में रास्तों के बार-बार बंद होने, गाड़ियों के लंबे काफिलों और मलबा साफ होने में देरी के लिए तैयार रहें। अपनी यात्रा के लिए वैकल्पिक रूट चुनें और रिफंडेबल स्टे ही बुक करें।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस पूरे हफ्ते हिमाचल प्रदेश में बारिश का सिलसिला बना रहेगा। हालांकि, 6 सितंबर को राज्य के कई शहरों में केवल हल्की से मध्यम बारिश ही दर्ज की गई है। कसौली और कांगड़ा के वेदर डैशबोर्ड पर बादलों और हल्की बौछारों के बीच 'नो वॉर्निंग' दिखाई दे रही है। राज्य मौसम बुलेटिन का कहना है कि 10-11 सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश होगी, जबकि कुछ इलाकों में तेज बारिश के झोंके आ सकते हैं। सफर शुरू करने से पहले संबंधित जिले की ताजा एडवाइजरी जरूर जांच लें, क्योंकि कम समय की तेज बारिश भी रास्तों को तुरंत ब्लॉक कर रही है।

हिमाचल में बारिश का असर: NH-3 और नालागढ़-शिमला रूट पर डायवर्जन
नेशनल हाईवे-3 (NH-3) पर पंडोह और झालोगी के पास लगातार हो रहे भूस्खलन की वजह से ट्रैफिक बार-बार रुक रहा है। यहां 4-माइल और 9-माइल वाले मोड़ सबसे ज्यादा संवेदनशील बने हुए हैं। मुख्य हाईवे बंद होने पर पुलिस छोटे वाहनों को कमांद-कटौला-बजौरा वाले वैकल्पिक रास्ते से भेज रही है। यह रास्ता काफी संकरा है, जिससे गाड़ियाँ बेहद धीमी रफ्तार से निकल पाती हैं। नई बारिश के बाद यहां वन-वे ट्रैफिक और लंबा जाम लगना तय है। औट या पंडोह से आगे बढ़ने से पहले मंडी पुलिस की एडवाइजरी जरूर देखें और कटे हुए पहाड़ों के नीचे रुकने से बचें।
नालागढ़-रामशहर-शिमला हाईवे पर कुमारहट्टी-मितियां के पास भारी भूस्खलन हुआ है। यहां सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है और मलबे की वजह से चिकनी खड्ड का पानी रुकने से एक खतरनाक झील बन गई है। इस रूट पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप है। अनुमति मिलने पर बद्दी-कालका-सोलन या अर्की-कंडाघाट रास्तों का इस्तेमाल करें। सड़क पर कीचड़, गिरते पत्थरों और शाम के बाद घने कोहरे के लिए तैयार रहें। जब तक हालात सुधर नहीं जाते, पहाड़ी रास्तों पर रात में ड्राइविंग करने से परहेज करें।
सुरक्षित विकल्प, वोल्वो-ट्रेन बैकअप और होटल रिफंड के टिप्स
अगर आपको अपनी ट्रैवल लोकेशन बदलनी है, तो कसौली, सोलन या पालमपुर जैसे इलाकों का रुख कर सकते हैं, जहां रास्ते फिलहाल सुगम हैं। दिल्ली से आ रहे हैं तो चंडीगढ़ तक शताब्दी एक्सप्रेस से सफर करें। वहां से टैक्सी लेकर धर्मपुर पहुंचे, जहां से आंशिक रूप से बहाल धर्मपुर-शिमला टॉय-ट्रेन पकड़ी जा सकती है। इसके अलावा बस से भी आगे बढ़ा जा सकता है। HRTC दिल्ली और चंडीगढ़ से अपनी बस सेवाएं चला रहा है, बस सीट की स्थिति पहले जांच लें। अपने यात्रा समय में 3 से 5 घंटे का अतिरिक्त मार्जिन रखें और प्री-पेड होटल बुकिंग रीशेड्यूल करते वक्त खराब मौसम का हवाला देकर कैंसिलेशन फीस में छूट मांगें।
अगर यात्रा टालना नामुमकिन हो, तो साथ में कैशलेस पेमेंट के साधन, टॉर्च, रेन गियर और स्नैक्स जरूर रखें। बिलासपुर या सोलन पहुंचते ही गाड़ी का फ्यूल टैंक फुल करवा लें। अपनी लाइव लोकेशन, तय रूट और होटल की डिटेल परिवार के साथ शेयर करें। सरकारी एडवाइजरी और स्क्रीनशॉट दिखाकर होटलों से बिना किसी पेनल्टी के तारीख बदलने की बात करें। इस हफ्ते नदियों और खड्डों के किनारे बने स्टे से दूरी बनाएं। साथ ही सोलन और मंडी कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर हमेशा अपने पास रखें।



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