उज्जैन में इस सोमवार, 3 अगस्त से बाबा महाकाल की भव्य सवारी निकलने वाली है, जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि इस मानसूनी आध्यात्मिक यात्रा में शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे। भगवान शिव की पालकी के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए परिवहन और दर्शन के समय का खास प्लान तैयार किया गया है।
यह पवित्र सवारी आमतौर पर शाम 4:00 बजे मंदिर के मुख्य द्वार से शुरू होती है। चांदी की पालकी में सवार होकर बाबा महाकाल शिप्रा नदी के तट पर स्थित राम घाट की ओर प्रस्थान करते हैं, जहाँ विशेष पूजन और आरती की जाती है। श्रद्धालुओं के बड़े हुजूम को संभालने के लिए शहर के ट्रैफिक रूट में बड़े बदलाव किए गए हैं।

महाकाल सवारी मार्ग और ट्रैफिक डायवर्जन
उज्जैन पुलिस ने शहर की सीमाओं के भीतर बड़े स्तर पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया है। शाम के व्यस्त समय के दौरान भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे अपने वाहन कर्कराज या कालिंदी मैदान में बने निर्धारित पार्किंग जोन में ही खड़े करें। मंदिर के मुख्य क्षेत्र तक पहुँचने के लिए पैदल चलना सबसे आसान और तेज़ तरीका रहेगा।
सवारी के मुख्य समय के दौरान सामान्य दर्शन की व्यवस्था सीमित रह सकती है। भीड़ को मैनेज करने के लिए हरसिद्धि मंदिर और चार धाम के पास बने प्रवेश द्वारों का उपयोग किया जाएगा। श्रद्धालु कतार की रियल-टाइम स्थिति जानने के लिए मंदिर के आधिकारिक पोर्टल की मदद ले सकते हैं। मानसून की फुहारें इस पवित्र अनुभव में एक अलग ही आध्यात्मिक चमक बिखेर देती हैं।
| सेवा का प्रकार | मुख्य जानकारी |
|---|---|
| सवारी की शुरुआत | शाम 4:00 बजे, मंदिर से |
| पार्किंग जोन | कर्कराज और कालिंदी |
| रेलवे हेल्पलाइन | डायल करें 139 |
उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे का क्राउड मैनेजमेंट प्लान
पश्चिम रेलवे (WR) की टीम ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त मैनेजमेंट प्लान लागू किया है। उज्जैन जंक्शन पर यात्रियों के आने और जाने के लिए 'वन-वे' सिस्टम का पालन किया जाएगा। ट्रेनों के शेड्यूल की ताजा जानकारी के लिए यात्री नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES) का उपयोग करें। यात्रा से जुड़ी किसी भी पूछताछ के लिए हेल्पलाइन नंबर 139 सक्रिय रहेगा।
दिल्ली-एनसीआर या उत्तर प्रदेश से आने वाले यात्री ठहरने के लिए होटल की बुकिंग पहले ही करा लें। मानसून के कारण नदी के घाटों के पास की सड़कों पर फिसलन हो सकती है, इसलिए सावधानी बरतें। अपने जरूरी सामान के लिए छोटे वाटरप्रूफ बैग साथ रखना एक समझदारी भरा फैसला होगा। होटल तक पहुँचने के लिए केवल अधिकृत ई-रिक्शा का ही उपयोग करें।
यह पावन परंपरा भारतीय आध्यात्मिक जीवन की एक अद्भुत झलक पेश करती है। शाम की भारी भीड़ से बचने के लिए दोपहर से पहले शहर पहुँच जाना बेहतर रहेगा। अपनी यात्रा को सुरक्षित और सुखद बनाने के लिए हमेशा स्थानीय पुलिस के दिशा-निर्देशों का पालन करें। बाबा महाकाल की यह सवारी आपके लिए मंगलमय हो।



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