शनिवार, 5 सितंबर 2026 की सुबह तक ब्रज में जन्माष्टमी की रौनक अब नंदोत्सव के उल्लास में बदल चुकी है। बीती रात कृष्ण जन्मभूमि पर मध्यरात्रि जन्मोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, वहीं वृंदावन की मिठाइयों वाली गलियां आज भी गुलजार हैं। अगर आप दिल्ली-एनसीआर से मथुरा-वृंदावन जाने का प्लान बना रहे हैं, तो जानिए कहां मिलेगा असली प्रसाद, किन पेड़ा काउंटरों पर करें भरोसा, देर रात खाने की सुरक्षित जगहें और ट्रैफिक डायवर्जन से बचने के आसान टिप्स।
बांके बिहारी मंदिर के पंचांग के मुताबिक, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाई गई, जिसके बाद तड़के दुर्लभ मंगला आरती हुई। वहीं नंदोत्सव आज यानी शनिवार, 5 सितंबर को मनाया जा रहा है। मथुरा जन्मभूमि पर 4 और 5 सितंबर की दरमियानी रात निशिता काल में पूजा-अर्चना हुई, यही वजह है कि सुबह तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। आज देर रात त्योहार के समापन तक प्रमुख मंदिरों के आसपास भारी भीड़ रहने की उम्मीद है।

मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी फूड ट्रेल: कहां क्या खाएं
मथुरा की प्रसिद्ध 'पेड़े वाली गलियों' से खरीदारी के लिए होली गेट, जन्मभूमि और चौक के पास जिला प्रशासन की आधिकारिक सूची में शामिल दुकानों पर ही जाएं। बेहतरीन क्वालिटी के लिए ब्रिजवासी की शाखाएं और राधिका स्वीट्स सबसे भरोसेमंद नाम हैं। हमेशा रेट बोर्ड देखकर वजन के हिसाब से ही खरीदारी करें। बांके बिहारी मंदिर के पास प्रसाद काउंटरों पर माखन-मिश्री और पेड़े की मांग सबसे ज्यादा रहती है। नाश्ते में बेढ़ई और कचौड़ी के लिए शंकर मिठाई वाला बेहतरीन विकल्प है, वहीं ओमा पहलवान की दुकान सुबह करीब 7 बजे खुल जाती है।
मिडनाइट भोग/प्रसाद और देर रात खाने के सुरक्षित विकल्प
बीती रात जन्मभूमि पर मध्यरात्रि भोग के दौरान सबसे ज्यादा भीड़ रही। कुछ वैष्णव केंद्रों पर देर तक कीर्तन और दर्शन का सिलसिला जारी है, इसलिए निकलने से पहले संबंधित मंदिर के अपडेट जरूर जांच लें। हाइजीनिक खाने के लिए इस्कॉन स्थित 'गोविंदा' रेस्टोरेंट रात 9:30 बजे तक बंद हो जाता है; इसके बाद सीलबंद स्नैक्स या गरमा-गरम पका हुआ खाना ही चुनें। FSSAI लाइसेंस नंबर और प्रॉपर लेबल वाली सीलबंद पानी की बोतल ही खरीदें और ठेले वालों से बर्फ लेने से बचें।
मथुरा-वृंदावन: ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग व्यवस्था
पुलिस ने शहर में कड़े नियम लागू किए हैं। वृंदावन और जन्मभूमि क्षेत्र में 3 सितंबर से 5 सितंबर तक बाहरी वाहनों की नो-एंट्री और रूट डायवर्जन लागू रहेगा। तय पार्किंग स्थलों की जानकारी QR-लिंक्ड एडवाइजरी के जरिए ली जा सकती है। मंदिर तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा या पैदल चलने का प्लान बनाएं। ताज़ा अपडेट्स के लिए @mathurapolice के आधिकारिक हैंडल फॉलो करें और किसी भी मदद के लिए 112 पर कॉल करें। भीड़ के पीक आवर्स के दौरान बांके बिहारी मार्ग और जन्मभूमि की ओर जाने वाले रास्तों पर जाने से बचें।
| समय / दायरा | नियम व पाबंदी | काम का सुझाव |
|---|---|---|
| 3 सितंबर, सुबह 8 बजे से 5 सितंबर, सुबह 9 बजे तक | बाहरी वाहनों की नो‑एंट्री | तय पार्किंग में गाड़ी खड़ी करें; ई‑रिक्शा का इस्तेमाल करें |
| प्रमुख मंदिर क्षेत्र | रूट डायवर्जन और बैरिकेडिंग | QR एडवाइजरी और पुलिस सोशल मीडिया हैंडल्स फॉलो करें |
दिल्ली-मथुरा वापसी के विकल्प और बजट टिप्स
देर रात वापसी के लिए ट्रेनों की सुविधा उपलब्ध है: नई दिल्ली से मथुरा के लिए रात करीब 11:15 बजे तक ट्रेनें हैं, जबकि निजामुद्दीन और मथुरा के बीच जन्माष्टमी स्पेशल ट्रेनें 3 से 5 सितंबर तक चल रही हैं। सराय काले खां से रात करीब 11:55 बजे तक बसें मिल जाती हैं। सफर शुरू करने से पहले NTES या UPSRTC ऐप पर समय जरूर चेक कर लें। सुबह के नाश्ते के लिए होली गेट पर सुबह 6:30 से 7:00 बजे के बीच दुकानें खुलनी शुरू हो जाती हैं।
मथुरा-वृंदावन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और फूड लवर्स के लिए काम की सलाह: मंदिर दर्शन के समय और खाने की योजना के बीच सही तालमेल बिठाएं। होली गेट पर मिठाइयों की खरीदारी भीड़-भाड़ के समय के बजाय दिन के उजाले में करें। प्रसाद हमेशा जानी-मानी दुकानों से लें, गरमा-गरम व ताजा खाना खाएं, सीलबंद पानी साथ रखें और देर रात हल्का या पैक्ड खाना ही इस्तेमाल करें। रूट डायवर्जन और होटलों में कमरों की किल्लत के बावजूद, एनसीआर से एक दिन की यात्रा पर आने वाले लोग आसानी से अपनी सुरक्षित और सुखद यात्रा पूरी कर सकते हैं।



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